जीवन में सुख का आना

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Hello दोस्तों आज में अपने इस आर्टिकल में जीवन में सुख का आना के बारे में आपके साथ अपने विचार व्यक्त करुँगी। मैंने अपने इस ब्लॉग में पहले भी सुखी जीवन पर आर्टिकल शेयर किया हुआ है। 

जो की सुखी जीवन कैसे जिए पर था।लेकिन ये आर्टिकल जीवन में सुख का आना पर है।हम सभी अपने जीवन में सुख चाहते है और चाहना भी चाहिए।क्योकि हमारे जीवन में सुख का होना बहुत ही जरूरी होता है। 

क्योंकि कोई भी व्यक्ति अमीर है या गरीब ये मायने नहीं रखता।लेकिन उस व्यक्ति के जीवन में कितना सुख है ये बहुत मायने रखता है। 

जिस तरह आपने मेरे उस आर्टिकल को पसंद किया उम्मीद करती हूँ की आपको मेरा ये आर्टिकल भी पसंद आयेगा। 

जिस तरह हमारे जीवन में दुःख बुरे कर्मो का फल होता है उसी प्रकार से सुख अच्छे कर्मो का फल होता है।लेकिन इसके प्रति एक बहुत बड़ी गलत फहमी भी देखने को मिलती है। 

जो की ठीक से समझना बहुत जरूरी है। बहुत समय से यह धारणा आमतौर से पायी जाती है की अपनी सुख सुविधाओं, मौज-मस्ती, शानदार जिंदगी जीने के लिए धन का बहुत मात्रा में होना बहुत जरूरी है। 

इसीलिए इस धारणा के कारण बहुत से लोग हर समय, हर तरह से किसी भी उपाय को करके चाहे वह अच्छा हो या बुरा ज्यादा से ज्यादा धन कमाने में जुटे रहते है 

जबकि असलियत यह होती है की धन से हम सुख के साधन ही खरीद सकते है न की सुख खरीद सकते है।क्योंकि सुख बाजार में नहीं खरीदा जा सकता। 

ऐसे में वो धन तो बहुत इकट्ठा कर लेते है परन्तु उनके जीवन से सुख कही गायब सा हो जाता है।लेकिन दूसरे लोगो को उनमे यही दिखाई देता है की वह लोगअपने जीवन में 

हुत सुखी है और मजेदार जिंदगी जी रहे है। 

पर ये एक गलत फहमी है क्योकि सुख हमे मिलता है पूर्व कर्मो के फल से जिसमे वर्तमान के कर्म और सुख साधन सहयोगी हो जाते है। 

जब हमारे शुभ कर्मो के फल का उदय होता है तो हम अपने जीवन में सुख भोगते है और जब अशुभ कर्मो के फल का उदय होता है तो हम अपने जीवन में दुःख भोगते है। 

जिस तरह से अशुभ कर्मो का फल शांति व सहजता से भोगने से वह अशुभ कर्म समाप्त हो जाते है उसी प्रकार से शुभ कर्म के फल को भी न्याय के मार्ग से, श्रेष्ठ साधन और शुभ कर्म करते हुए भोगने से सुख की वृद्धि होती है और अशुभ परिणाम नहीं होते।

बहुत से लोग बेईमानी से, गलत साधनों से धन कमाना चाहते है परन्तु वे ये नहीं जानते की धन भी तभी प्राप्त होता है।जब पूर्व कर्मानुसार भाग्य में होता है। 

अगर हमारे भाग्य में धन होता है।तो बेईमानी अन्यायपूर्ण उपाय किये बिना भी मिल जाता है और ऐसा धन ज्यादा समय तक टिकता है। 

अगर भाग्य में धन नहीं होता तो कितने भी अच्छे या बुरे प्रयत्न कर लो धन नहीं मिलता और अगर मिल भी जाये तो ज्यादा समय तक नहीं टिकता। 

अगर ऐसा न होता तो जितने भी चोर, डाकू, जेबकतरे आदि गलत रास्ते से धन कमाने वाले है। वे सब अपने जीवन में बड़े धन सम्पन्न, खुशहाल और सुखी होते। 

लेकिन ऐसा नहीं है।क्योंकि अन्याय के रास्ते से वे ही धन सम्पन्न बन पाते है।जिनके भाग्य में धन सम्पन्न होना होता है। वे अगर अच्छे कर्म भी करे तो भी उनको धन सम्पन्नता प्राप्त हो जाती। 

इन सब बातों में फर्क बस इतना सा है की भाग्य मतलब की पूर्व कर्म के अनुसार जो धन सम्पन्नता उन्हें मिलनी ही थी वह उन्होंने अन्यायी और गलत साधनों से प्राप्त की और अपने जीवन में अशुभ कर्म का बंधन बांध लिया और पाप के भागी बन गए। 

इसलिए जीवन में सुख प्राप्त करने के लिए शुभ कर्मो का होना जरूरी है।जीवन में सिर्फ धन सम्पदा का होना ही काफी नहीं होता क्योंकि जीवन में भाग्य हमारे ही कर्मो से बनता है। 

इसलिए हमे अपने जीवन में सदैव अच्छे कर्म करने चाहिए। सही तरीको से अपनी पूरी मेहनत और लगन से बिना किसी का हक मारे, बिना किसी को नुकसान पहुँचाये बिना धन को कमाना चाहिए। 

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