ह्रदय (दिल) को स्वस्थ रखने के घरेलू उपचार | Home Remedies For Healthy Heart

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homer Remedice For healthy heart

आजकल की लाइफ स्टाईल सबसे बड़ा कारण है हार्ट प्रॉब्लम का इसलिए सबसे पहले अपनी लाइफ स्टाइल को सही करना अतिआवश्यक है।समय से उठना समय से खाना और समय से सोना अतिआवश्यक है।ह्रदय को स्वस्थ रखने के लिए जरूरी है की पौष्टिक भोजन करें, तनाव और क्रोध से दूर रहें, मॉर्निंग वॉक पर जाए और हो सके तो मेडिटेशन भी जरूर करें।

ह्रदय (दिल) को स्वस्थ रखने के घरेलू उपचार 

  • एक आधा छोटा चम्मच अगर का चूर्ण और एक चम्मच शहद को मिलाकर सुबह या शाम एक टाइम लेने से ह्रदय स्वस्थ होता है और ह्रदय की दुर्बलता दूर होती है। 
  • 500 मिली दूध में 10 ग्राम गुड़ व 10 ग्राम अर्जुन की छाल का चूर्ण मिलाकर एक बर्तन में पका लें और इसे रत को सोते समय पिए इससे ह्रदय स्वस्थ रहता है और इसे पीने से ह्रदय की दुर्बलता भी दूर होती है। 
  • मिश्री और आंवला को बराबर मात्रा में लेकर चूर्ण बना लें और इस चूर्ण को 5 ग्राम की मात्रा में रोज सेवन करने से ह्रदय संबंधी समस्त रोग दूर होते है। 
  • ह्रदय (दिल) के रोगी को भोजन को नियमित रूप से लेना भी सबसे बड़ा घरेलू उपचार है। 
  • अगर ह्रदय रोगी का वजन ज्यादा हो तो सबसे पहले उसे अपना वजन कम करना चाहिए।ह्रदय रोगी को उपवास से बचना चाहिए। 
  • ह्रदय को स्वस्थ रखने के लिए रोगी को चाहिए की वह कैल्शियम, सोडियम, विटामिन बी-1 युक्त आहार ही लें। 
  • ह्रदय के रोगी को सब्जियों के रस, किशमिश, अंजीर, गाय का ताजा दूध, सब्जियों के सूप और फलों के रस का सेवन करना चाहिए। 
नोट किसी भी उपचार में दी गई किसी चीज से अगर आपको एलर्जी हो तो वो उपचार आप मत करें।और ध्यान रखें की ह्रदय रोग जिस व्यक्ति को हो वो उपवास न ही करे तो ज्यादा अच्छा होगा। 


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विटामिन ' डी ' की कमी से होने वाली बीमारियां, विटामिन ' डी ' की उपयोगिता और प्राप्ति के साधन

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विटामिन ' डी ' की कमी से होने वाली बीमारियां, उपयोगिता और प्राप्ति के साधन
विटामिन हमारे शरीर के लिए बहुत उपयोगी तत्व है।ये हमारे स्वास्थ्य के लिए अतिआवश्यक है।विटामिनयुक्त भोजन लेने से हमारे शरीर में संतुलन बना रहता है और अंग स्वस्थ रहते है।इनकी कमी से कई प्रकार के रोग हो जाते है।भोजन पचाने और शरीर को शक्ति देने में यह बहुत सहायक है।

विटामिन ' डी ' की उपयोगिता और प्राप्ति के साधन 

विटामिन ' डी ' में दो तरह के अलग-अलग रासायनिक तत्व है।यह दोनों तत्व सूर्य की किरणों के प्रभाव से परिवर्तित होकर निर्मित होते है।पहला तत्व वनस्पति से निर्मित होता है और दूसरा जीवित व्यक्तियों की त्वचा में।इन दोनों तत्वों के सम्मिलित रूप को विटामिन ' डी ' की संज्ञा दी गई है।वसा के कणों के साथ इसका भी आंतो में अवशोषण होता है और लीवर, गुर्दे, एड्रिनल ग्रंथि तथा अस्थियों में संचय होता है।यहां से जरूरत के अनुसार शरीर के अवयवों की कोशिकाओं में प्रवेश करता रहता है।विटामिन ' डी ' न तो ऑक्सीजनीकरण से नष्ट होता है और न पकाने से।

विटामिन ' डी ' की उपयोगिता :यह विटामिन खून में कैल्शियम की मात्रा को नियमित रखता है और खून में क्षारीय फॉसफेरेज
एंजाइम को नियमित रूप से बनाये रखता है।यह विटामिन कैल्शियम और फास्फोरस के विशेषण में सहायता करता है।ताकि हड्डियों और दांतो को खनिज पदार्थ इच्छित मात्रा में मिल सकें।

प्राप्ति के साधन :विटामिन ' डी ' का सबसे महत्वपूर्ण साधन धूप है।प्रतिदिन धूप अवश्य लेनी चाहिए क्योंकि धूप लेने से विटामिन में ' डी ' की पूर्ति होती है।यह शरीर में निर्मित होने की क्षमता रखता है।विटामिन ' डी ' का साधन मछली के तेल, दूध, अंडे, मक्खन आदि में पाया जाता है।

विटामिन ' डी ' से होने वाली बीमारियां 

  • इसकी कमी होने से दिल की बीमारी होने का खतरा बढ़ जाता है। 
  • डायबटीज होने का खतरा रहता है। 
  • हड्डियां कमजोर हो सकती है और कैंसर जैसी बीमारी का भी खतरा बना रहता है। 
  • हार्ट अटैक और हाई ब्लड प्रेशर संबंधित बीमारी होने का भी डर रहता है। 
  • विटामिन ' डी ' की कमी से बच्चे रिकेट्स बीमारी से पीड़ित हो जाते है, इस बीमारी में अस्थियां कमजोर हो जाती है और मुड़ जाती है।जोड़ो पर सूजन, घुटनों का अधिक अलगाव, रीद की हड्डी में टेढ़ापन और दांतो का देर से निकलना। 
ये भी देखें : हाई ब्लड प्रेशर के घरेलू इलाज

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विटामिन ' के ' की कमी से होने वाली समस्याएं, उपयोगिता और प्राप्ति के साधन

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विटामिन ' के ' की उपयोगिता और प्राप्ति के साधन

विटामिन हमारे शरीर के लिए बहुत उपयोगी तत्व है।ये हमारे स्वास्थ्य के लिए अतिआवश्यक है।विटामिनयुक्त भोजन लेने से हमारे शरीर में संतुलन बना रहता है और अंग स्वस्थ रहते है।इनकी कमी से कई प्रकार के रोग हो जाते है।भोजन पचाने और शरीर को शक्ति देने में यह बहुत सहायक है।

 विटामिन ' के ' की  उपयोगिता और प्राप्ति के साधन 

विटामिन ' के ' हमारे लिए उतना ही जरूरी है जितना की जीवित रहने के लिए हमारा सांस लेते रहना।यह विटामिन सूर्यताप और प्रकाश से नष्ट हो जाता है।पर यह आंतो में निर्मित होता रहता है।इसलिए इसकी आवश्यकता बहुत कुछ अपने आप पूरी होती रहती है। 

विटामिन ' के ' की उपयोगिता : विटामिन ' के ' रक्त को जमाने का काम करता है।अगर इस विटामिन की कमी हो जाये तो रक्तस्त्राव (खून का बहाव) को रोकना मुश्किल हो जाता है।ये विटामिन लीवर को भी स्वस्थ रखता है।यह ग्लूकोज को कोशिकाओं की झिल्ली में प्रवेश कराने में और ग्लूकोज को ग्लाइकोजन में परिवर्तित करने में भी मददगार होता है। 

प्राप्ति के साधन : विटामिन ' के ' हरी साग-सब्जियों, अंडे की जर्दी, टमाटर, सोयाबीन, आलू, गोभी, छिलकेयुक्त अनाज  और मक्खन से मिल जाता है। 

विटामिन ' के ' की कमी से होने वाली समस्याएं 

  • विटामिन ' के ' की कमी होने से हड्डियों को कमजोर करने वाली बीमारी हो जाती है जिससे की हड्डियां कमजोर और खोखली हो जाती है।45 से ज्यादा उम्र की लोगों को विटामिन के का सेवन भरपूर मात्रा में करना चाहिए।
  • विटामिन ' के ' की कमी होने से व्यक्ति को हार्ट की समस्या का भी हो सकती है क्योकि विटामिन ' के ' का  संबंध रक्त से होता है और रक्त को पंप करने का काम हार्ट का है। 
  • विटामिन ' के ' की कमी होने पर आपको लगने वाली हर छोटी या बड़ी चोट पर बहने वाला रक्त (खून) रोकना मुश्किल हो जाता है क्योकि इसकी कमी सीधे ब्लड क्लॉटिंग की प्रक्रिया पर असर डालती है। 

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विटामिन ' ए ' से होने वाले स्वास्थ्य लाभ

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विटामिन ' ए ' से होने वाले स्वास्थ्य लाभ

विटामिन हमारे शरीर के लिए बहुत उपयोगी तत्व है।ये हमारे स्वास्थ्य के लिए अतिआवश्यक है।विटामिनयुक्त भोजन लेने से हमारे शरीर में संतुलन बना रहता है और अंग स्वस्थ रहते है।इनकी कमी से कई प्रकार के रोग हो जाते है।भोजन पचाने और शरीर को शक्ति देने में यह बहुत सहायक है।

विटामिन ' ए ' से होने वाले स्वास्थ्य लाभ 

इसे " वृद्धिकारक विटामिन " विटामिन भी कहा जाता है।यह शरीर में कैरोटीन नामक पदार्थ से बनता है।कैरोटीन वनस्पतियों से हमारे शरीर में पहुंचता है।यह कैरोटीन शरीर में पहुंचकर रस विशेष द्वारा विटामिन ए में परिवर्तित हो जाता है। 

विटामिन ' ए ' की प्राप्ति के साधन : दूध, अंडा, मक्खन,हरी सब्जियां, पपीता, आम, गाजर, टमाटर, ताजे फल, काजू, बादाम, अखरोट। 
  1. शरीर की वृद्धि के लिए विशेषकर छोटे बच्चों तथा गर्भस्थ शिशुओं के लिए यह बहुत जरूरी है।इसकी कमी होने से पूर्ण विकास में बाधा पड़ती है। 
  2. विटामिन ' ए ' आँखों को लाभ पहुंचाता है इसकी कमी होने से आंखे कमजोर हो जाती है। 
  3. त्वचा के कोषों को भी विटामिन ' ए ' की आवश्यकता होती है।
  4. यह त्वचा की कोमलता और स्निग्धता को बनाए रखता है।
  5. विटामिन ' ए ' की कमी से स्नायुविक तंतुओ पर बुरा प्रभाव पड़ता है तथा पायरिया और पथरी रोग होने का डर रहता है। 
  6. विटामिन ' ए ' की कमी होने पर खांसी, जुकाम, निमोनिया तथा श्वास-पथ के अन्य रोग हो जाते है। 
ये भी देखे : खुजली (खारिश) रोकने के घरेलू उपचार

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सामान्य सिरदर्द दूर करने के 5 घरेलू उपचार | 5 Natural Home Remedies to Cure Headache

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 5 Natural Home Remedies to Cure Headache

दोस्तों आज में आपको इस आर्टिकल में सामान्य सिरदर्द दूर करने के 5 घरेलू उपचार बताउंगी।ये बहुत ही इजी उपचार है और लाभकारी भी है।ये उपचार मेरी दादी-नानी के बताये हुए है।जो की में आप लोगों के साथ शेयर कर रही हूँ।
  1. 1 कप दूध में पीसी इलायची मिलाकर पीने से सिरदर्द में आराम मिलता है। 
  2. अगर तेज गर्मी की वजह से सिरदर्द हो तो तुलसी के पत्तो को पीसकर सिर पर लेप करने से राहत मिलती है। 
  3. अगर सिरदर्द गैस की वजह से है तो गर्म पानी में नींबू निचोड़कर पीने से सिरदर्द दूर होता है। 
  4. अगर सिरदर्द सर्दी जुकाम की वजह से है तो साबूत धनिया और मिश्री का काढ़ा बनाकर पीने से जल्द आराम मिलता है। 
  5. गुड़ को पानी में घोलकर फिर छान लें और इस पानी को पी ले इससे भी सिरदर्द में आराम मिलता है। 
ये भी देखें : दांत दर्द में घरेलू उपचार 

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खुजली (खारिश) रोकने के घरेलू उपचार | Home Remedies For Itching

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Home Remedies For Itching

आज में अपने इस आर्टिकल में आपको खुजली रोकने के घरेलू उपचार बताउंगी जो की बहुत लाभकारी है।अगर आपको  खुजली हो तो आप घर पर ही इन उपायों का प्रयोग कर सकते है। 
  1. तिल के तेल को थोड़ा गर्म करके रोज मालिश करने से कुछ ही दिनों में खुजली होना बंद हो जाती है। 
  2. 1 टमाटर के रस में ताजे नारियल का रस मिलाकर मालिश करने से खुजली होना बंद हो जाती है। 
  3. दूध और पानी बराबर मात्रा में मिलाकर थोड़ी सी रुई की सहायता से खुजली होने के स्थान पर लगाए और थोड़ी देर बाद स्नान कर लें।इससे भी खुजली होना बंद हो जाती है। 
  4. सरसों के तेल में साबुत लाल मिर्च और अजवायन डालकर पकाले और ठंडा होने पर छान लें। अब इस तेल को खुजली वाली जगह पर हल्के हाथों से मालिश करें या इस तेल को लगा लें।इस तेल से जल्दी आराम मिलता है। 
  5. नींबू के रस में सरसों और हल्दी पीसकर उबटन तैयार कर ले।अब इस उबटन को खुजली वाली जगह लगाकर छोड़ दे जब ये सुख जाये तो ठंडे पानी से धो ले।इस उबटन से खुजली होना बंद हो जाता है। 
  6. खुजली वाली जगह पर चमेली का तेल लगाने पर भी आराम मिलता है। 
  7. अरहर की दाल को दही के साथ पीसकर उसका पेस्ट बना ले और इस पेस्ट को खुजली के स्थान पर लगाए।इससे आपको 3-4 दिन में ही खुजली होना बंद हो जाएगी। 
  8. नींबू और चमेली के तेल को समान मात्रा में मिलाकर इससे खुजली वाली जगह पर मालिश करे इससे भी तुरंत आराम मिलता है। 
  9. अगर आपकी स्किन ड्राई होने की वजह से खुजली हो रही है तो आप उस जगह ठंडे दही की मालिश करें और बाद में पानी से धो ले।इससे खुजली होना बंद हो जाती है। 
  10. अगर खुजली पुरानी है तो आप संतरे के छिलको को पानी के साथ पीस ले और इसे खुजली वाली जगह मलने से 4-5 दिन में ही खुजली होना बंद हो जाएगी। 
ये भी देखें : मोटापा कम करने के 7 घरेलू उपाय

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नानखटाई बनाने की विधि | Nankhatai In Oven's Convection Mode

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Nankhatai recipe

सामग्री 

  • आधा कप मेदा 
  • 1/4 कप बेसन 
  • 1/4 कप सूजी (रवा)
  • चुटकी भर नमक 
  • आधा टीस्पून बेकिंग पाउडर 
  • आधा कप चीनी (पीसी हुई)
  • आधा टीस्पून इलायची पाउडर 
  • आधा कप शुद्ध घी 
  • बादाम कटे हुए 

नानखटाई बनाने की विधि | Nankhatai In Oven's Convection Mode 

  1. सबसे पहले एक बाउल में घी और चीनी डालकर अच्छी तरह मिक्स करें। 
  2. अब इस मिक्सचर में मेदा, सूजी, बेसन, इलायची पाउडर, नमक और बेकिंग पाउडर मिलाकर डो तैयार कर लेंगे। 
  3. अब इस डो के छोटे-छोटे पेड़े बना लें और चाकू से पेड़े के ऊपर दो साइड से कट का निशान बना दे और कटे हुए बादाम ऊपर रख दे। 
  4. माइक्रोवेव ओवन को 200 डिग्री पर प्रीहीट कर ले। 
  5. अब ओवन की ट्रे में इन पेड़ों को रख दे। 
  6. अब इस ट्रे को 180 डिग्री पर 15 मिनट के लिए कन्वेक्शन mode पर Bake कर लें। 
  7. अब ओवन से ट्रे को निकाले और नानखटाई बनकर तैयार है। 
  8. इसे आप ठंडा होने पर किसी एयरटाइट डिब्बे में रखें। 
नोट: घी की जगह आप मक्खन का भी यूज कर सकते है।ध्यान रहे की आप जितना घी डालो उतना ही चीनी डालो।आप ड्राईफ्रूट कोई सा भी डाल सकते हो और ये डालना जरूरी नहीं है। 


आपने मेरे इस आर्टिकल को पड़ा इसके लिए में आपका हार्दिक धन्यवाद करती हूँ। इसमें दिए गए व्यंजन की विधि को घर पर जरूर बना कर देखें और नीचे दिए गए कमेंट में सूचित करने की कृपा करें।😊😊

कंम्प्यूटर रिलेटेड प्रश्न/उत्तर | Computer Related Questions/Answers

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computer Related Question/Answer

प्रश्न:(1)  कंप्यूटर के अविष्कारक कौन थे ?
उत्तर:(1)  चार्ल्स बैबेज

प्रश्न:(2) CPU और I/O के बीच सिग्नलों के मूवमेंट को कौन नियंत्रित करता है ?
उत्तर:(2)  कंट्रोल यूनिट

प्रश्न:(3) CPU का पूर्ण रूप क्या है ?
उत्तर:(3) Central Processing Unit

प्रश्न:(4) सबसे पहले कंम्प्यूटर का नाम क्या था ?
उत्तर:(4) ENIAC

प्रश्न:(5) किसी कंम्यूटर के प्रोग्राम में बच्चों द्वारा प्रयुक्त भाषा प्रायः कौन सी होती है ?
उत्तर:(5) लोगो

प्रश्न:(6) CPU में कंट्रोल, मेमोरी और तीसरा कौन सा यूनिट होता है ?
उत्तर:(6) अर्थमैटिक/लॉजिक

प्रश्न:(7) आधुनिक कंम्प्यूटर की खोज सर्वप्रथम कब हुई थी ?
उत्तर:(7) 1946 

प्रश्न:(8) मेगाबाइट (MB) कितने बाइट के बराबर होते है ?
उत्तर:(8) 1024 KB 

प्रश्न:(9) कंप्यूटर साक्षरता दिवस कब मनाया जाता है ?
उत्तर:(9) 2 दिसम्बर  

प्रश्न:(10) USB का फूल फॉर्म क्या है ?
उत्तर:(10) यूनिफार्म सिरियल बस 

ये भी देखे : Full Forms of Some Important Abbreviations
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योग से शरीर का स्वास्थ्य तथा मन की शांति कैसे प्राप्त होती है ?

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yoga

नाड़ी-संस्थान तथा मस्तिष्क को स्वस्थ व शांत रखने के लिए योग के अतिरिक्त अन्य कोई मार्ग नहीं है।मन मस्तिष्क को स्वस्थ रखें बिना आप शरीर को स्वस्थ नहीं रख सकते है।विज्ञान ने आज इतनी उन्नति की है, फिर भी व्यक्ति आज जितना दुखी है उतना पहले कभी नहीं था।

प्रकृति का एक नियम है की सुविधा देने से सुविधा मिलती है।सुख देने से सुख मिलता है, दान देने से धन मिलता है।यदि दूसरा असुविधा में होगा, तो आपको सुविधा मिलना असंभव है।यदि दूसरा दुःखी होगा, तो आपको सुख मिलना मुश्किल है।यह समझने के लिए योग करने की आवश्यकता है।इसलिए हमारे शास्त्रों में प्रतिदिन ऐसी प्रार्थना करने पर बल दिया गया है।
ॐ असतो मा सद्द गमय - ॐ तमसो मा ज्योतिर्गमय - ॐ मृत्योर्मा  अमृतं गमय।  
अर्थ : हे प्रभु मुझे असत्य से सत्य की और ले चलो, अंधेरे से प्रकाश की और ले चलो, मौत से अमृत की ओर लें चलो। 
सर्वेषां स्वसितर भवतु - सर्वेषां शांतिभ्रावतु - सर्वेषां मंगलम भवतु -
सर्वेषां पूर्ण भवतु - लोकाः समस्ताः सुखिनो भवंतु।    
अर्थ : सब शांत हो, सब को शांति मिले, सब का मंगल हो, सब को पूर्णता मिले, पूरा संसार सुखी हो।
 सर्वे भवन्तु सुखिन : - सर्वे संतु निरामयाः, सर्वे भद्राणि पश्यन्तु - माँ कशिचद दुःखभागभवेत। 
अर्थ : सब सुखी हो, सब निरोगी हो, सब भली बातें देखें, कोई दुःखी न हो।
गायत्री मंत्र : ॐ भूर्भुवः स्वः। तत्सवितुवर्रेण्यं भर्गो देवस्य धीमहि। धियो योनः प्रचोदयात। 
अर्थ : हे प्राण, पवित्रता तथा आनंद के देने वाले प्रभु, तुम सर्वज्ञ, सकल जगत के उत्पादक हो, हम आपके उस उत्तम, पापविनाशक ज्ञान स्वरूप तेज का ध्यान रखते है, हमारी बुद्धि को प्रकाशित करता है।हे पिता,हमारी बुद्धि कभी भी आपसे विमुख न हो, वह सदा ही सत कार्यो में प्रेरित होती रहे।

योग से शरीर का स्वास्थ्य तथा मन की शांति कैसे प्राप्त होती है ? 

  • पहला काम शरीर को शुद्ध तथा स्वस्थ करने का है।योग की शुद्धि क्रियाये, जैसे नेति, धोती, कुंजल, एनिमा, शंख प्रशालन आवश्यक्तानुसार करें।
  • नित्यप्रति योगासनों तथा प्राणायाम का अभ्यास करें।योगासन करते हुए हम अपने शरीर को मोड़ते है, खींचते है फिर ढीला छोड़ते है। 
  • जिससे हमारे शरीर में रक्त की नलियां जो उंगली का बराबर मोटी भी है और बाल के बराबर बारीक़ भी है और साफ तथा शुद्ध होती है।
  • इससे ह्रदय को पूरे शरीर में शुद्ध रक्त पहुंचाने और गंदे रक्त को ह्रदय में वापस लाने में सुविधा होती है।ह्रदय को चौबीस घंटे काम करना पड़ता है।
  • इस अवधि मे वह पूरे शरीर को 8,000 लिटर खून का संचालन करता है।उतने ही रक्त को शरीर के विकार के साथ वापस लेता है और उन्हे शुद्ध होने के लिए फेफड़ो में भेजता है।
  • रक्त शुद्ध होकर वापस ह्रदय में आता है और वहां से पूरे शरीर में जाता है।15 सेकंड का यह चक्र जन्म से मृत्यु तक चलता रहता है।
  • हम दिन भर काम करके थक जाते है, तो आराम करते है।रात में 6-8 घंटे सोते भी है।
  • परंतु ह्रदय तब भी काम करता है, जबकि उसे भी आराम चाहिए और उसे आराम देने का एक ही तरीका है कि उसकी रक्त-संचालन की नलियों को साफ रखा जाए। 
  • ताकि वह सुविधापूर्वक पूरे शरीर के रक्त का संचालन कर सके और उसे वापस लेकर फेफड़ो में भेजकर शुद्ध कर सके।यह काम उन्हें धक्के लगाकर न करना पड़े।जिन अंगो में शुद्ध रक्त जायेगा, वे अंग पुष्ट होंगे, रोगमुक्त होंगे।
  • योगासनों व प्राणायाम से हमारे फेफड़े शुद्ध हो जाते है।छाती की मांसपेशियो में लचक आ जाती है, जिससे फैलने व सिकुड़ने की उनकी शक्ति बढ़ जाती है।
  • फलतः वे अधिक ऑक्सीजन ग्रहण करने लगते है और अधिक कार्बन डाइऑक्साइड गैस विकार के रूप में नाक से बाहर निकाल देते है।
  • योगासनों से हम अपने शरीर को साफ व अनुशासित करते है।जिस प्रकार आप अपने घर की व्यवस्था करते है,प्रतिदिन उसकी सफाई करते है, सामान को यथास्थान रखते है।
  • ताकि समय पर ढूंढ़ने पर परेशानी न हो, बच्चों को समय पर स्कूल भेजते है, समय पर भोजन बनाते है, ताकि व्यक्ति समय पर अपने काम पर जा सकें।
  • इस प्रकार की व्यवस्था करने से आप परेशान नहीं होते। घर में बात-बात पर झगड़ा नहीं होता और वातावरण तनावमुक्त रहता है।
  • ठीक उसी प्रकार प्रतिदिन नियमित रूप से योग करने से हम अपने शरीर को शुद्ध व तनाव मुक्त रखते है।शरीर की विकार-मुक्ति के चारों मार्ग-नासिका, त्वचा, गुर्दे और गुदा सक्रिय रहते है।
  • इससे शरीर में विकार रुकता नहीं।शरीर शिथिल व शांत रहता है।
ये भी देखे : ध्यान योग-भगवान श्री कृष्ण का ध्यान 

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पनीर टिक्का बनाने की विधि | Paneer Tikka Recipe

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paneer tikka recipe

सामग्री 

  • 300 ग्राम पनीर (टुकड़ो में काट लें)
  • 1 बड़ी शिमला मिर्च (टुकड़ो में काट लें)
  • 1 प्याज (टुकड़ो में काट ले)
  • 1 टमाटर (टुकड़ो में काट लें)

मेरिनेड 

1 कप दही (मलमल के कपड़े में 30 मिनट के लिए बांधकर लटका दें। 
3 बड़े चमच्च मलाई या क्रीम 
चुटकी भर ऑरेंज रंग 
2 चम्मच तेल 
1 बड़ा चम्मच कार्नफ्लोर 
1/2 छोटा चम्मच अमचूर 
1/2 छोटा चम्मच काला नमक
1/2 छोटा चम्मच लाल मिर्च पाउडर
3/4 छोटा चम्मच नमक
1 बड़ा चम्मच तंदूरी मसाला
1 बड़ा चम्मच अदरक लहसुन पेस्ट

पनीर टिक्का बनाने की विधि | Paneer Tikka Recipe 

  1. मेरिनेड की सारी सामग्री को बाउल में मिला लें। पनीर डाले और अच्छे से मिलाये। 
  2. ग्रिल रेक को तेल से चिकना करें।पनीर को चिकने रेक पर रखें या तंदूरी स्टिक पर लगाए।बचे हुए मेरिनेड में शिमला मिर्च, टमाटर और प्याज को अच्छे से मिला ले। सब्जियों को भी रेक पर रखें या स्टिक पर लगाए। 
  3. माइक्रोवेव ओवन को कन्वेक्शन पर 200 डिग्री तापमान पर प्रीहीट करें। 
  4. अब गरम् ओवन में टिक्के रखें। 
  5. ओवन को 15 मिनट के लिए 200 डिग्री पर सेट करें। टिक्को को 15 मिनट के लिए पकाये। 
  6. अब थोड़ा सा पिघला हुआ मक्खन टिक्को पर डालकर 3-4 मिनट के लिए ग्रिल करें। 
  7. अब ओवन से टिक्को को निकाल कर चाट मसाला और नींबू का रस डालकर हरी चटनी के साथ सर्व करें। 
ये भी देखे : माइक्रोवेव में 5 तरह के व्यंजन बनाने की विधि 

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रोग और उसका सही निदान (कारण)

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rog or ska shi nidana (Health Disease)
रोग का उपचार करने से पहले उसकी सही पहचान हो जानी बहुत आवश्यक है। इससे रोग की गंभीरता का पता चल जाता है और उसका उपचार सही तरीके से हो पाता है। यह इसलिए भी जरूरी है की कई बार रोग की दशा इतनी गंम्भीर हो चुकी होती है की उसके उपचार की आवश्यकता तुरन्त होती है।जांच से पता चल जाता है की ऑपरेशन जरूरी है या दवाई से ही ठीक हो जायेगा।

रोगी की दशा ऐसी होनी चाहिए कि सहज स्वाभाविक ढंग से योग तथा प्राकृतिक उपचार चलाया जा सके, क्योकि योग उपचार धीरे-धीरे प्रभाव डालता है और स्वस्थ होने में समय लगता है। इसमें धैर्य की भी आवश्यकता होती है।योग चिकित्सा उपचार करने के लिए अधिक बारीकी के टेस्टों व जांच की आवश्यकता नहीं पड़ती, क्योकि इस उपचार से पूरे शरीर की सफाई करके उसे शिथिल किया जाता है, ताकि शरीर की अपनी रोगो उपचार की शक्ति को जगाया जा सके और रोगी स्वस्थ हो जाये।

आजकल सब प्रकार के टेस्ट करवा लेने की सुविधाएं उपलब्ध है। इसलिए किसी अच्छे अनुभवी डाक्टर की देखरेख में आवश्यक जांच करवा लेनी चाहिए।रोग की गंभीरता का बहुत कुछ पता ह्रदय की धड़कन, श्वास की गति, जुबान के रंग, त्वचा की खुश्की, आंखो की चमक, चेहरे की घबराहट, बुखार की दशा, पेट की सफाई, भूख, पेशाब के रंग आदि से चल जाता है।इसलिए हेल्थ चेकप बहुत जरूरी है।

स्वस्थ व्यक्ति की पहचान 

1 . नाड़ी : स्वस्थ व्यक्ति की नाड़ी एक मिनट में 72-75 बार चलनी चाहिए।जन्म के समय बच्चे की नाड़ी 140 बार एक मिनट में।इसके बाद आयु बढ़ने के साथ-साथ नाड़ी की गति कम हो जाती है। बुढ़ापे में 60 से 70 बार तक चलती है।

2 . श्वास :सामान्य व्यक्ति एक मिनट में 14 से 18 बार श्वास लेता है।योगाभ्यासी व्यक्ति की श्वास 12-16 बार चलती है श्वास में आवाज है, तो छाती में कफ इकट्ठा हो रहा है। श्वास में बहुत बदबू आ रही है, नाक बार-बार बंद हो जाती है, मुख से श्वास लेना पड़ता है, तो समझना चाहिए कि शरीर में बहुत अधिक विकार इकट्ठा है। 

3 . जिह्वा : जिह्वा पर सफेद परत जमी है, तो पाचन ठीक नहीं, पेट साफ नहीं, शरीर में विकार बहुत है।जिह्वा खुरदरी, कटी-कटी बहुत सुर्ख है, तो गंभीर रोग है। 

4 . बुखार : सामान्यतः शरीर का तापमान 98 डिग्री रहना चाहिए।अधिक है, तो बुखार है, कम है, तो बहुत कमजोरी है, सावधानी की आवश्यकता है। 

5 . भूख : भूख अधिक लगती है और खाया पिया लगता नहीं, तो पेट में कीड़े है। पेट में दर्द रहता है, कभी कब्ज हो जाती है, कभी दस्त लग जाते है, भूख कम लगती है, तो  गयी है, शरीर में रोग पनप रहे है।यदि भूख नहीं लगती, शरीर कमजोर होता जा रहा है, चेहरा पीला पड़ता जा रहा है, तो शरीर में कोई गंभीर रोग। है जल्दी उपचार की जरूरत है। 

6 . पेशाब : पेशाब का रंग हल्का पीला रंग लिए साफ होना चाहिए। यदि जलन होती है, पेशाब कम होता है, रंग अधिक पीला है, तो गर्मी के रोग है।पेशाब गंदला है, गाढ़ा है, कम होता है, तो गुर्दे में या कहीं अंदर इंफेक्शन है, गुर्दों में खराबी आ रही है, पेशाब बार-बार आता है, चिपचिपा है, रोगी के में चीटियां लगती है, तो मधुमेह (शुगर) रोग है।रोग की जांच लैबोरेटरी से करवाई जा सकती है। 

  • कोई भी रोग पुराना ऐसे ही नहीं होता।जब छोटी-छोटी बीमारियों पर ध्यान नहीं दिया जाता, ढंग से उपचार नहीं किया जाता, केवल दवाइयों का सेवन किया जाता है।परहेज नहीं किया जाता, तो शरीर के अंदर के अंग दुर्बल हो जाते है, शरीर का विकार निकालने वाले अंग कमजोर हो जाते है।जिससे विकार शरीर में घर करने लगता है। 
  • जिसका परिणाम आयु के बढ़ने के साथ-साथ असाध्य रोग शरीर में घर कर जाते है, जिनका ठीक हो पाना असंभव हो जाता है, क्योंकि रोगों के कारण स्नायुमंडल निष्क्रिय हो जाता है।ऐसी दशा में बड़े धैर्य की आवश्यकता होती है।
  • ऐसे रोगो में योग तथा प्राकृतिक उपचार ही लाभ पहुंचा सकता है।यदि थोड़ी भी जीवनी शक्ति या अंदर के अंगो में कुछ काम करने की शक्ति बची हुई है, तो योग से स्वास्थ्य प्राप्त किया जा सकता है।इसके लिए रोगी का विश्वास बढ़ाया जाएं, जिससे वह निश्चयपूर्वक उपचार करने लगे। 

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भोजन करने के आवश्यक नियम

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bhojan karne ke awashyak niyaum(pachan kriya)

भोजन करने से हमें शक्ति मिलती है।भोजन शरीर की रक्षा का साधन है। भोजन पौष्टिक, विटामिन तथा खनिज लवणों युक्त जल्दी पचने वाला आहार है। इसे उचित मात्रा में ग्रहण करना चाहिए।तभी शरीर स्वस्थ रह सकता है।
  • भोजन ताजा ही करना चाहिए।लेकिन भोजन बनाकर रखना पड़े तो उसे स्वच्छ स्थान पर ढककर रखें और जब खाना हो तब भोजन को गरम् कर लेना चाहिए। 
  • बाजार से कभी भी खुली वस्तुएं, जिन पर मक्खी, मच्छर आदि बैठते हो नहीं खानी चाहिए। 
  • जब पूरी भूख हो तभी भोजन करना चाहिए। 
  • भोजन करने के बाद या पहले अधिक शारीरिक और मानसिक श्रम नहीं करना चाहिए। 
  • भोजन करने के बाद थोड़ी देर आराम कर लें या बाई करवट लेट जाएं।इससे पाचन क्रिया सुविधापूर्वक होगी। 
  • सप्ताह में एक समय या एक दिन उपवास या फलाहार लेना ही रोगों से बचने का सरल उपाय है। 
  • केवल उतना ही भोजन करना चाहिए जितनी भूख हो। 
  • दोपहर का भोजन हल्का और रात का भोजन भारी ले सकते है, क्योंकि दिनभर काम करने से शरीर की शक्ति काम में लगी रहती है और भोजन पच नहीं पाता।
  • रात के भोजन करने के कुछ समय बाद ही सोना अच्छा रहता है। इससे पूरी शक्ति खाना पचाने में लगती है। 
  • भोजन करते समय पूरा ध्यान भोजन की तरफ रखे और स्वाद लेकर खाएं। भोजन करते समय बात नहीं करनी चाहिए और न ही कोई किताब या अख़बार पड़ना चाहिए नहीं तो भोजन पचाने में रुकावट होती है। 
  • भोजन शांतिपूर्वक और ऐसे समय करें जब आप हड़बड़ी में न हो और मनचाहा समय भोजन करने में लगा सके। 
  • जिनका पेट खराब रहता हो, उन्हें एक समय में एक या दो प्रकार का ही पदार्थ खाना चाहिए और थोड़ा खाना चहिए। दूसरा पदार्थ दो ढाई घंटे बाद खा सकते है। इससे पाचन तंत्र पर दबाव नहीं पड़ेगा। 
  • समय से भोजन करें।यदि समय से भूख न लगे तो उस समय का भोजन छोड़ दे या सलाद व सब्जी खाकर उठ जाएं। 
  • बहुत गर्म के बाद बहुत ठंडा या बहुत ठंडे के बाद बहुत गर्म वस्तु खाना पाचन क्रिया के लिए उचित नहीं है। 
ये भी देखे : स्वास्थ्य के लिए व्यायाम का महत्व 

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पालक पनीर बनाने की विधि | Palak Paneer Recipe

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palak paneer banane ki vidhi

तैयारी का समय :10-12 मिनट 
बनाने का समय : 40-60 मिनट 
सर्विंग साइज : 6 बाउल 

सामग्री 

  • 1 किलो पालक 
  • 200 ग्राम पनीर के कटे हुए पीस (शुद्ध घी में नॉनस्टिक तवे पर फ्राई किया हुआ)
  • 2 प्याज (बारीक़ कटे हुए)
  • 3-4 (टमाटर बारीक़ कटे हुए)
  • 3-4 लहसुन (बारीक़ कटा हुआ)
  • 2 टीस्पून गरम मसाला 
  • 1 छोटा चम्मच जीरा 
  • हींग चुटकी भर 
  • 1 टीस्पून हल्दी 
  • 1 टीस्पून धनिया पाउडर 
  • 1 टीस्पून जीरा पाउडर 
  • 3-4 लौंग 
  • किचन किंग मसाला 
  • शुद्ध घी आवश्कतानुसार 
  • 2 चम्मच क्रीम या मलाई फिटी हुई 
  • पानी आवश्कतानुसार 

पालक पनीर बनाने की विधि 

  1. सबसे पहले पालक की डंडिया काट कर पालक को अच्छी तरह से धो लें। 
  2. अब एक कुकर में पालक डाले और थोड़ा पानी डालकर 1 सिटी लगाकर उबाल लें।
  3. जब पालक उबल जाये तो कुकर का ढकन हटाकर पालक को थोड़ा ठंडा होने दे। इसके बाद कुकर में ही ब्लेंडर चलाकर पेस्ट बना ले या मिक्सी में पीस ले।(मिक्सी में पिसते समय पालक बिल्कुल गरम् नहीं होनी चाहिए)
  4. अब एक कड़ाही में घी डालकर गर्म करें अब इसमें हींग, लहसुन, जीरा, लौंग, डाले जब ये हल्का ब्राउन हो जाए तो इसमें कटे हुए प्याज डालकर अच्छी तरह भुने प्याज भुनने के बाद टमाटर डाले अब नमक, हल्दी, जीरा पाउडर, धनिया पाउडर, गरम मसाला, किचन किंग मसाला डालकर इसे अच्छी तरह भून ले। 
  5. जब मसाला घी छोड़ने लगे तब इसमें कटे हुए फ्राई पनीर के पीस डालकर मसाले में अच्छे से मिक्स कर ले। 
  6. अब इसमें पालक का पेस्ट डालकर मिक्स करे और आवश्कतानुसार पानी डालकर 15-20 मिनट तक पकने के लिए रख दे। 
  7. अब पालक पनीर की सब्जी बनकर तैयार है।इसे एक बाउल में निकाल कर ऊपर से क्रीम डालकर सर्व करें। 
टिप्स : जब पालक को कड़ाही में डालकर पकाए तो ख्याल रखें की बनाते समय उसमे से बहुत छीटे निकलती है। इसलिए  कड़ाही पर ढ़कन जरूर लगाए और मध्यम आंच पर पकाएं।प्याज और टमाटर को आप मिक्सी में भी पीस सकते हो।पालक का पेस्ट ज्यादा पतला नहीं होना चाहिए।


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आटे के लडडू बनाने की विधि | Atta Laddoo Recipe

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Laddoo

सामग्री 

  • 2 कप आटा 
  • 100 ग्राम सफेद तिल 
  • 1/2 कप सूजी 
  • गुड़ आवश्यकतानुसार 
  • 1 टीस्पून सोंठ 
  • 8-10 बादाम 
  • 8-10 काजू 
  • 50 ग्राम नारियल बुरादा 
  • शुद्ध घी आवश्यक्तानुसार 
  • 2 टीस्पून चिरोंजी 
  • पानी आवश्यक्तानुसार 

आटे के लडडू बनाने की विधि 

  1. सबसे पहले एक कड़ाही में आटा भून ले और अलग बर्तन में निकाल ले। 
  2. अब सारे ड्राईफ्रूट कड़ाही में भून ले व इसे मिक्सी में दरदरा पीस ले और एक बर्तन में निकाल ले। 
  3. अब तिल को भी हल्का सा भून ले और अलग बर्तन में निकाल ले। 
  4. अब एक बर्तन में गुड़ की चासनी बना ले और इसमें सोंठ डाले। 
  5. अब एक कड़ाही में घी गर्म करे और इसमें आटा, ड्राईफ्रूट, तिल को डालकर धीमी आंच पर मिक्स करे और इसमें गुड़ की चासनी को डाल कर फिर मिक्स करे। 
  6. जब सारा मिश्रण अच्छी तरह मिक्स हो जाये तो तुरन्त गैस बन्द कर दे और इस मिश्रण को एक बाउल में निकाल ले और थोड़ा मिश्रण मुट्ठी में लेकर बॉल की शेप में लडडू बना ले।
नोट : ध्यान रखें की मिश्रण को ठंडा न होने दे थोड़ा गर्म मिश्रण में ही लडडू बनाये नहीं तो लडडू सही नहीं बनेंगे और अगर घी की मात्रा कम होगी तब भी लडडू नहीं बनेंगे।इसलिए हमेशा ख्याल रखें किसी भी तरह के लडडू बनाये तो मिश्रण थोड़ा गरम हो और मिश्रण ज्यादा ड्राई न हो नहीं तो उसमे गुनगुन घी को ऊपर से डाल सकते है। 


आपने मेरे इस आर्टिकल को पड़ा इसके लिए में आपका हार्दिक धन्यवाद करती हूँ। इसमें दिए गए व्यंजन की विधि को घर पर जरूर बना कर देखें और नीचे दिए गए कमेंट में सूचित करने की कृपा करें। 😊😊