हमारी मनोवृति और उसके प्रभाव | Mentality of Human

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हम आज जो कुछ भी है, जो कुछ भी हम होते है, जो कुछ भी हम हो सकते है, जो कुछ भी हम कल को होंगे या हो सकते है, जो कुछ भी हम करते है, या करने वाले होते है, इन सभी गतिविधियों का संबन्ध हमारी मनोवृत्ति से होता है। जैसे हमारे विचार होते है वैसी ही हमारी मनोवृत्ति निर्मित होती है और जैसी मनोवृत्ति निर्मित होती है वैसे ही हमारे विचार होते है। यह आपस में जुड़े हुए है।

हमारे विचारों और मनोवृत्ति का आधार होते है हमारे संस्कार। बचपन में जैसे ही हम होश संभालते है वैसे ही हमारे संस्कार बनना शुरू हो जाते है जिनके निर्माण में माता पिता की शिक्षा, परिवार का वातावरण और समाज के प्रभाव का बहुत हाथ होता है।हमारे विचार और अाचार का हमारे अन्तरमन पर बड़ा सूक्षम और गहरा प्रभाव पड़ता रहता है और यही प्रभाव हमारे संस्कार बनाने का कार्य करता है। जैसे हमारे संस्कार होते है वैसी ही हमारी मनोवृत्ति बनती जाती है। हमारे व्यक्तित्व के निर्माण में हमारी मनोवृति का बहुत हाथ होता है।

यही वजह है कि हमारा आज जो भी, जैसा भी व्यक्तित्व है वह सिर्फ इस वजह से है कि हम वैसे ही परिवार में पैदा हुए, वैसा ही स्वभाव बनाया और वैसी ही बातें सीखी जैसी उस परिवार के वातावरण में थीं और जैसी हमने अपने बडो से सीखी। या यह कहिये कि हमें समझाई गई, सिखाई गई।

आज हमारी जो भी मान्यताएं है, जो भी सिद्धांत हम मान रहे है या जो कुछ आचरण हम कर रहे है इसमें विरासत का पैतृक प्रभाव का बहुत हाथ है। इसमें हमारा चुनाव नहीं है, बल्कि इस रूप में हमे बचपन से ही ढाल दिया गया है और हम अपने आपको ऐसा समझ बैठे है, जैसे की हम है।

यदि हम मांसाहारी के यहाँ पैदा हुए, बचपन से ही हम मांसाहार करते आये है तो आज मांस से हमे कोई घृणा नहीं होगी क्योकि मांसाहार करना हमारी मनोवृत्ति में शामिल हो गया है। यदि हम शाकाहारी का घर पैदा हुए है तो हमारी मनोवृति शाकाहारी हो जाएगी।

इसी प्रकार हम जिस जाती, धर्म, वर्ग, समाज या सम्प्रदाय में जन्म लेते है उसी का अनुसार हमारी मान्यताएं और मनोवृत्ति निर्मित हो जाती है। हम अपने को वैसा ही मानने लगते है।

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