पति पत्नी दो गहरे मित्र

Husband and wife are two best friends.

दोस्तों इस आर्टिकल में मै आपसे पति पत्नी दो गहरे मित्र के बारे में चर्चा करुँगी। जो की पति पत्नी के सम्बन्धों के विभिन्न रूप हो सकते है और उनमे से एक है मित्रता का, घनिष्ट, अटूट और आत्मीय मित्रता का, जो जीवन पर्यन्त कायम रहती है या कहिए की रहनी चाहिए। यूं पति का शाब्दिक अर्थ 'स्वामी' या 'संरछक' होता हैऔर पत्नी हिस्सेदार अर्थात लाइफ पार्टनर यानि अर्धागिनी। इस प्रकार यह सम्बन्ध संसार के सभी प्रकार के सम्बन्धों में विलक्षण एवं विशिष्ट है। जो दम्पत्ति इन सम्बन्धों को निभा लें जाते है उनका जीवन सुख और समृद्धि से पूर्ण रहता है।

 गाड़ी के दो पहिए 

एक गाड़ी के दो पहिऐ या रेल की दो पटरियों जैसे दाम्पत्य जीवन के दो अंग है पति पत्नी, जो यदि तन मन से मिल जुल कर रहें तो दो गहरे मित्र की तरह वैसे ही एक रूप हो जाते है। जैसे दो नदियों का संगम हो जाने पर उन दोनों नदियों का जल एकाकार हो जाता है वरना विपरीत स्थिति में दाम्पत्य रस रूपी जल सुख जाने से नदी के दो किनारों की तरह वे आमने सामने और सदा साथ रहते हुए भी हमेशा अलग और न मिल सकने वाले होकर रह जाते है। दाम्पत्य जीवन के विशाल वृक्ष से निकलने वाली शाखें पत्तियां, फल फूल तभी हरे भरे रह सकते है जब यह दाम्पत्य-वृक्ष मजबूत और गहरी जड़ो वाला हो।

समान गुण

समान गुण कर्म स्वभाव होने पर प्रीति स्थिर रहती है और सम्बन्ध घनिष्ट व स्थायी रहते है यह सूत्र पति पत्नी को हमेशा ध्यान में रखकर परस्पर ऐसा ही आचरण करना चाहिए। यदि गुण कर्म स्वभाव में अन्तर हो तो प्रेम, सहानुभूति और सद्बुद्धि से काम लेकर परस्पर सामन्जस्य पैदा करने की सच्चे व सरल मन से पूरी कोशिश करना चाहिए ताकि व्यर्थ के मतभेद और विवाद न पैदा हो अन्यथा मानसिक तनाव से घर का वातावरण दूषित होने लगेगा जिसका दुष्प्रभाव परिवार के सभी सदस्यों के स्वास्थ्य का नाश करता रहेगा। दाम्पत्य जीवन का अच्छा या बुरा प्रभाव पति पत्नी के अलावा उनकी सन्तान पर भी पड़ता है जिसके बुरे प्रभाव होते है। इसलिए पति पत्नी को एक दूसरे के साथ दो गहरे मित्र की तरह रहना चाहिए

सूझबूझ

यह पति पत्नी की सूझबूझ और चतुराई पर ही निर्भर है कि वे अपने घर का वातावरण हल्का फुल्का, प्रसन्नतापूर्ण और पारस्परिक सहयोग से भरा हुआ बनाए रखें जिसके लिए उदार, सौजन्यतापूर्ण एवं सहयोगात्मक व्यवहार किया जाना बहुत आवश्यक है तभी तो पति पत्नी दो गहरे मित्र बनकर रहेंगे।

बीजारोपण 

दो गहरे मित्रता का बीजारोपण दाम्पत्य जीवन के प्रारम्भ से ही हो सकता है जब पति पत्नी पहली बार मिलते है। अंग्रेजी में एक कहावत है कि first impression is the last impression अर्थार्त पहले पहल के प्रभाव का प्रभाव दूरगामी होता है। दो बिल्कुल अजनबी प्राणी विवाह संस्कार के बन्धन में बंधकर सदा सदा के लिए साथी बनते है इसीलिए उन्हें जीवन साथी कहा जाता है।

समर्पण भाव 

यह बड़ी अद्भुत बात है कि जो एक दूसरे को जानते न थे कभी मिले ही न थे वे जब मिल जाते है तो थोड़े ही समय में दूध पानी जैसे एकाकार हो जाते है। जितना अपनापनऔर प्यार पति पत्नी के रूप में मिलने वाले इन दो अजनबियों में पैदा हो जाता है या हो सकता है। इस मधुर प्रगाढ़ता का आधार स्तम्भ है समर्पण भाव। नारी में तो ख़ैर यह गुण जन्म जात ही होता है और होना भी चाहिए। 

पर पुरुषों में भी यह गुण समुचित मात्रा में होना चाहिए क्योंकि कुछ मुकाम ऐसे होते है, कुछ परिस्थितियां ऐसी होती है और कुछ आवश्यकताएं ऐसी होती है जब पुरुष को भी अपना 'पुरुष पन' छोड़कर भावनात्मक स्तर पर नारी से सामन्जस्य करना जरूरी हो जाता है क्योंकि वह सामन्जस्य दाम्पत्य जीवन में माधुर्य और स्थायित्व बनाए रखता है। दोनों इस जीवन यात्रा में सफल हमसफर बनकर यात्रा को सुखद व सफल बना सकते है।

सिक्के के दो पहलू 

जरा गहरे में सोचें तो पुरुष में नारी और नारी में पुरुष कुछ कुछ अंशो में मौजूद होते है। दर असल नर नारी एक ही सिक्के के दो पहलू है, एक ही वस्तु के दो भाग है जो परस्पर मिलकर ही पूर्ण होते है, एक बनते है। दोनों एक दूसरे के अर्द्धांग और एक दूसरे के बिना आधे व अधूरे है। इसी अधूरेपन को पूरा करने की भावनावश वे दोनों एक दूसरे के प्रति आकर्षित रहा करते है। इस सच्चाई को जिस पति पत्नी ने मन से स्वीकार कर लिया, आचरण में उतार लिया और बुद्धिपूर्वक जी लिया उनके सम्बन्ध ही सच्चे मित्रों जैसे रह पाते है।मित्र वही होता है जो मित्र के दुख को दूर करने की जी जान से कोशिश करें। 

कर्तव्य एवं अधिकारों का पालन 

 जहां तक पत्नी का प्रशन है तो भारतीय नारी तो जन्मजात संस्कारों से ही समर्पित, धैर्यशील, सहनशील और तपस्वी स्वभाव की होती है और पति का प्यार व सहयोग पाकर उसकी जीवनलता खूब फलती फूलती है लेकिन प्रायः पति अपने स्वभाववश, अहंकारवश या जीविकोपार्जन एवं दुनियादारी के अनेक कारणों, तनावों और संकटों से ग्रस्त होने के कारण ऐसी कुंठाओं से ग्रस्त रहते है कि वह पत्नी के प्रति पूर्ण, सजग, भावुक और संवेदनशील नहीं रह पाते।

फलस्वरूप उनके व्यवहार में उपेक्षा, लापरवाही, अवहेलना और रूखेपन के तत्व पनपने लगते है जो वक्त पर ही सम्हाले न जाए तो धीरे धीरे यही तत्व विरोध, वैचारिक मतभेद, विवाद, तनाव, कलह और कभी कभी अलगाव का रूप धारण कर लेते है इसमें महिलाएं उतनी दोषी और जिम्मेदार नहीं होती जितना पुरुष होते है। पति से समुचित और सामान्य व्यवहार प्राप्त करना पत्नी का अधिकार है और यही पति के लिए कर्तव्य हो जाता है। जो एक का अधिकार होता है वही दूसरे के लिए कर्तव्य हो जाता है और पति एवं पत्नी दोनों को ही अपने अपने कर्तव्य एवं अधिकारों का पालन करना चाहिए। 

 बाहरी और भीतरी जिम्मेदारी 

यदि पुरुष परिवार का प्रधान और सर्वेसर्वा होता है अधिक पुरुषार्थी और परिश्रमी होता है तो पत्नी भी घर की स्वामिनी और घरेलू मामलों की सर्वेसर्वा होती है। और अपने ढंग से, अपने स्तर और सामर्थ्य से अधिक परिश्रम करते हुए वह भी कोई कसर उठाकर नहीं रखती। दरअसल दम्पत्ति का बाहरी रूप पति और भीतरी रूप पत्नी होती है। घर से बाहर पति और घर के अन्दर पत्नी का कार्यक्षेत्र एवं उत्तरदायित्व रहे तो सन्तुलन ठीक रहता है। 

इस प्रकार पति पत्नी एक सच्चे मित्र और सहयोगी का रूप में आचरण कर परस्पर अटूट आस्था और प्रेम की भावना रखें तो वे पति पत्नी होने के साथ ही भावुक और रोमांटिक प्रेमी प्रेमिका भी बने रह सकते है।
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