अदरक के गुण और उपयोग

Ginger
 दोस्तों आज में अपने इस आर्टिकल में अदरक के गुण और उपयोग के बारे में बताऊंगी। दोस्तों हमारी रसोई में जो भी खाद्य पदार्थ है वे सभी किसी न किसी रोग में उपयोगी सिद्ध होते है बशर्ते हमें उनके गुण लाभ औरउपयोग के विषय में जानकारी हो। अदरक से सभी परिचित है। शीतकाल में शाक सब्ज़ी के मसलों में अदरक का हल्की सी मात्रा में उपयोग होता है। चाय में अदरक डाली जाती है। और चटनी बनाते समय भी अदरक का प्रयोग किया जाता है। इसलिए मैने सोचा क्यों न आपके साथ आज में अदरक की उपयोगिता और गुण शेयर करू जो की हम अपनी रसोई में रोज इस्तमाल करते है उम्मीद करती हूँ की ये आर्टिकल आपको पसन्द आए।

अदरक के गुण

अदरक मल भेदक, भारी, तिष्ण, गरम, चरपरा पाक में मधुर तथा वात व कफ को नष्ट करता है। सोंठ के गुण अदरक में भी होते है। भोजन से पहले नमक के साथ अदरक खाने से रूचि, भूख, जठरागिन और पाचन शक्ति बढ़ती है, जीभ और कंठ का शोधन होता है। जिन्हें कुष्ठ पाण्डु, कुच्छर, रक्तपित्त, घाव, ज्वर दाह रोग से ग्रस्त रोगी को तथा ग्रीष्म और शहद ऋतु में अदरक का सेवन वर्जित है।

अदरक के उपयोग 

रसोई सम्बन्धी उपयोग के अलावा अदरक को औषधिय ढंग से भी नाना प्रकार की व्याधियों को नष्ट करने के लिए उपयोग में लिया जाता है। कुछ बहुत उपयोगी प्रयोग यहां प्रस्तुत किये जा रहे है।
  1. अदरक को बारीक़ काटकर उस पर थोड़ा नमक बुरक लें। इसे भोजन के साथ खाने से भूख खुलती है और पाचन अच्छा होता है। 
  2. अदरक का रस और शहद बराबर मात्रा में मिलाकर शीशी में रख लें। दिन में दो बार इसे सुबह व शाम चाटने से खांसी में आराम होता है। सर्दी जुकाम व बैठे हुए गले में लाभ होता है।
  3.  अदरक को बारीक-बारीक कतर कर कटोरी में रखे और एक टुकड़ा गुड़ डाल कर आग पर रख दे। थोड़ी देर में गुड़ पिघलने लगेगा तब चमच्च से गुड़ को हिलाकर मिलालें। जब अच्छी तरह पिघल कर दोनों पदार्थ पिघल जाए तो उतार लें। इसे थोड़ा गरम 1 या 2 चमच्च चाटने से कफ़ युक्त खांसी में आराम होता है। इसे खाने के 1 घण्टे बाद तक पानी नहीं पीना चाहिए। या सोते समय चाटकर कुनकुने गरम पानी से कुल्लाकर मुँह साफ करके सो जाना चाहिए बहुत लाभप्रद उपाय है। 
  4. उल्टी रोकने के उपाय में अदरक बहुत गुणकारी होता है। अदरक का रस 1 चमच्च लेकर जरा सा सेंधा नमक व काली मिर्च बुरक लें और चाट लें। आवश्यकता पड़े तो घण्टे भर बाद 1 खुराक और ले लें। 
  5. पतले दस्त लग रहे हो तो 1 कप पानी गर्म कर उबाल लें। उबाल आने पर पानी एक कप में डाल लें और इसमें एक चमच्च अदरक का रस डाल कर जितना गरम पी सके उतना गरम पी लें। दिन में 2 या 3 बार इस उपाय को करने से दस्त बन्द हो जाते है। 
  6. अदरक के बारीक़ टुकड़े कर चूसने से हिचकी फौरन बन्द होती है। इसके साथ ही घी मिलाकर खाने या अदरक का रस निकल कर 1-1 चमच्च सुबह शाम चाटने से वात प्रकोप और वात शूल में आराम होताहै। 
  7.  अदरक 500 ग्राम किसा हुआ और अच्छी मात्रा में नींबू का रस,  काली मिर्च व सेंधा नमक मिलाकर अच्छी तरह हिलाकर मिक्स कर लें। अब इन टुकड़ों को साफ कपड़े पर फैला कर धूप में रखकर अच्छी तरह से सूखा लें। इसका 1 टुकड़ा मुंह में रखकर चूसे। इसके सेवन से बैठा हुआ गला ठीक होता है, खांसी व कफ विकार में लाभ होता है, भूख खुलती है पाचन अच्छा होता है और मसूड़ों को लाभ होता है। 

नोट 

ग्रीष्म ऋतु, कवार के मास में, रक्त पित्त और पीलिया रोग में तथा शरीर की तासीर बहुत गर्म होने पर अदरक का सेवन वर्जित है।

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इस आर्टिकल में अदरक के गुण और उपयोग के बारे में बताऊंगी। दोस्तों हमारी रसोई में जो भी खाद्य पदार्थ है वे सभी किसी न किसी रोग में उपयोगी सिद्ध होते है बशर्ते हमें उनके गुण लाभ औरउपयोग के विषय में जानकारी हो।