कपूर के 4 लाभकारी प्रयोग

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kapoor

  1. यदि आप आंखो में लगाने वाला काजल घर पर बनाती है।तो उसमें थोड़ा कपूर डाल दे। 
  2. दांतो में कीड़ा लग जाने पर थोड़ा कपूर रात को सोते समय दांतो में रख कर सोएं। इससे कीड़े अंदर ही अंदर मर जाएंगे। यह प्रयोग पायरिया के लिए भी है। सुबह गुनगुने पानी से कुल्ला कर लेना चाहिए। 
  3. घर पर कभी कपूर रखना हो तो काली मिर्च या लौंग के साथ एक बंद डिब्बी में रखने से उड़ता नहीं है। 
  4. एक बोतल में आधा लीटर पानी डालें उसमे 10 ग्राम डल्ले वाला कपूर डाले और 2 दिन धूप में रखें। थोड़ा गल जाने पर  यूज करे।किसी को खट्टी डकार, जी मचलाना, पेट दर्द, पेट मरोड़ आदि हेतु इस पानी को 1-1 चम्मच पीने को दे, अवश्य लाभ होगा। शीशी में पानी खतम होने पर और पानी डालते जाएं जब तक कपूर पूरा नहीं गल जाएं। 
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फिटकरी के 5 लाभकारी प्रयोग

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fitkari

इस आर्टिकल में मै आपको फिटकरी के 5 लाभकारी प्रयोग बताउंगी जो की बहुत लाभकारी है।
  1. यदि पसीना अधिक आता हो तो पानी में फिटकरी डाल कर स्नान करें। 
  2. सरसों के तेल में फिटकरी पीसकर मिला दें, फिर जहां जहां चीटियां हो वहां छिड़क दें, तुरन्त भाग जाएंगी। 
  3. जामुन की लकड़ी का कोयला 1 तोला, फिटकरी भुनी हुई 1 तोला दोनों को बारीक़ पीसकर दांत पर लगाने से रक्त आना बंद  जाता है। 
  4. भुनी फिटकरी को बारीक़ पिसले, आँखों की पलकों पर लगाने से पानी गिरना बंद होता है व लाली दूर हो जाती है। 
  5. भुनी फिटकरी को बारीक़ पीस लें। एक शीशी में १०० ग्राम गुलाबजल लेकर 2 चुटकी फिटकरी दाल कर खूब हिलाएं। गल जाने पर कपड़े में छान कर रख लें। सोते समय 2 बून्द आँखो में डाले। यह आँखो के लिए बहुत लाभकारी है। 
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बालों का झड़ना रोकने के 8 घरेलू उपाय

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hair fall
आज इस आर्टिकल में मै बालों का झड़ना रोकने के 8 घरेलू उपाय बताउंगी जो की बहुत ही लाभकारी है।आजकल बाल झड़ने की समस्या आम बात है। आजकल तो छोटे बच्चो के भी बाल बहुत झड़ते है। पॉल्यूशन, सही भोजन न खाना, बालो में  तेल न लगाना इत्यादि कारणों से बाल झड़ते है। ये उपाय इस प्रकार है।
  1. आवंले का चूर्ण रात को भिगो दें। सुबह उसे मसलकर पानी निकाल ले। इस पानी में 1-2 नींबू निचोड़ लें। अब जिस तरह शैंपू करते है वैसे ही इस पानी से बालो को भिगोकर मसाज करें। 
  2. 1 चम्मच साबुत काले तिल और 1 चम्मच भांगरे के पंचाग (फूल, फल, पत्ती, तना, जड़) को बारीक़ पीसकर पानी के साथ सेवन करें। 
  3. कनेर की जड़ की छाल और लौकी 10-10 ग्राम लेकर उसे दूध में पीसकर सिर पर लेप करें। 
  4. तुलसी पत्र स्वरस, भृंगराज पत्र स्वरस और आंवला बारीक़ पीसकर मिलालें। इसे बालों पर लगाए। इससे बालों का झड़ना बंद होने लगता है और बाल धीरे-धीरे काले होने लगते है। 
  5. हरसिंगार के बीजो को पीसकर लेप तैयार करें। इसे नियमित रूप से सिर पर लगाएं। यह बालों के झड़ने और गंजेपन में लाभदायक है। यह प्रयोग 3-4 महीने तक करना चाहिए। 
  6. नींबू के रस में बरगद की जटा पीसकर उससे बाल धोये और फिर नारियल का तेल लगाएं। इससे बाल झड़ने बंद हो जाएंगे। 
  7. उड़द की दाल को उबाल लें और फिर सिर पर रगड़ रगड़ कर लगाएं। कुछ ही दिनों में बालों का झड़ना रुक जाएगा। 
  8. नीम के तेल की 4-4 बूंदे नाक के दोनों छेदो में नियमित 1 महीने तक डालें। भोजन में नियमित रूप से दूध का सेवन करे। इससे बालों का झड़ना अवश्य कम होगा। 

7 घरेलू उपाय माईग्रेन के दर्द से राहत पाने के लिए

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migraine
 आज मै इस आर्टिकल मे आपको 7 घरेलू उपाय माईग्रेन के दर्द से राहत पाने के लिए बताउंगी। जो की बहुत लाभकारी है। ये उपाय इस प्रकार है।
  1. सूर्योदय से पहले नारियल व गुण के साथ छोटे चने के बराबर कपूर मिलाकर 3 दिन तक खाएं। माईग्रेन का दर्द चला जायेगा। 
  2. गाय का ताजा घी सुबह शाम नाक में डालने से आराम मिलता है। 
  3. बड़ी इलायची का छिलका बारीक़ पीसकर हल्का गर्म करके सिर पर लेप लगाने से आराम मिलता है। 
  4. केसर को घी में पीसकर सूंघने से माईग्रेन का दर्द चला जाता है। 
  5. दिन में दो बार दही चावल का सेवन करने से लाभ होता है। 
  6. लौंग को गर्म करके पीसले और इसका लेप बनाकर सिर पर लगाये इससे सिर का दर्द मिटता है। 
  7. दही चावल और मिश्री को मिलाकर सूर्योदय से पहले खाने से सूर्योदय के साथ घटने बढ़ने वाले दर्द में आराम मिलता है।       
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कैसे करें नाखूनों की देखभाल

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nails
दोस्तों आज में इस आर्टिकल में आपको कैसे करें नाखूनों की देखभाल के बारे में बताउंगी। आप घर बैठे ही नाखूनों की देख रेख कर सकते है। चेहरे की सुंदरता के साथ-साथ नाखूनों का सुन्दर होना भी जरूरी है। नाखूनों को हफ्ते में 1 बार जरूर काटे। समय-समय पर क्लीनिंग करें और हो सके तो महीने में एक बार मैनिक्योर और पैडीक्योर कराए।
  • नाख़ूनो को गर्म पानी से अच्छी तरह साफ करके सूखा लें। और कोलगेट पेस्ट को जरा-जरा सा नाखूनों पर लगाएं। और 5 मिनट तक स्क्रब करें। फिर गुनगुन पानी से धो लें। इससे नाखूनों का पीलापन कम होगा। ये उपाय आपको हफ्ते में 1 बार करना है। 
  • नाख़ून अगर सख्त है तो एक कटोरी गुनगुन पानी में 5-6 मिनट डुबोकर रखें। इससे नाख़ून मुलायम होते है। काटने में भी आसानी होगी। 
  • नाखूनों के ऊपरी भाग को गोलाकर काटें ताकि वो जल्दी टूटे नहीं और मजबूत बनें। 
  • क्यूटिकल पुशर से नाखूनों के चारों तरफ की मृत त्वचा को धीरे०-धीरे पीछे सरकाते रहे। इससे नाखून बड़े व लम्बे दिखेंगे। 
  • हफ्ते में 1 बार सरसों के तेल की मालिश करें। 
  • रात को सोने से पहले जरूर नाखूनों की कोई भी मॉस्टराइजर क्रीम से मसाज करें। ये आप रोज भी कर सकते है। 
  • नाखूनों की चमक बढ़ाने के लिए हफ्ते में 1 बार नारियल के तेल की मालिश करें।
  • नाखूनों को स्वस्थ और मजबूत बनाने के लिए खाने में प्रोटीन, कैल्शियम, आयरन, विटामिन बी और विटामिन सी युक्त चीजें लें। जैसे दूध, दही, हरी सब्जियां, सलाद आदि।   
  • जब भी नाखूनों की सफाई करें या मालिश करें तो ध्यान रखें की नेल पेंट जरूर हटा दे और कभी-कभी बिना नेल पेंट के भी नाखून रखें। 
  • ज्यादा दिन तक एक ही नेल पेंट नहीं लगाना चाहिए नहीं तो नाखून पीले हो जाते है। नाखूनों की चमक भी चली जाती है 
  • कभी भी सस्ती वाली नेल पेंट या नेल रिमूवर नहीं यूज करनी चाहिए। नहीं तो आपके नाखून खराब होंगे और उनमें जल्दी पीलापन आएगा व चमक भी नहीं रहती। हमेशा ब्रान्डेड नेल पेंट यूज करें।                    

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बालों को असमय सफेद होने से बचाने के 9 उपाय

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WHITE HAIR

दोस्तों आज में अपने इस आर्टिकल में बालों को असमय सफेद होने से बचाने के 9 उपाय बताउंगी। आजकल बालों का सफेद होना आम बात है। आजकल तो छोटे-छोटे बच्चों के बाल सफेद हो रहें है। कई कारणों की वजह से बाल सफेद होते है जैसे ज्यादा टेंशन लेना, सही पोषण न मिलना, पॉलुशन इत्यादि। तो आइए जानते है की हम बालों को असमय सफेद होने से कैसे बचाएं। 
  • आंवलों को नीम और मेहंदी के पत्तों के साथ दूध में पीसकर रात को बालों में लेप करें। सुबह धो लें। यह प्रयोग हफ्ते में 2 बार करें। 
  • लौह चूर्ण, हरड़, बहेड़ा, आंवला और काली मिट्ठी को पीसकर चूर्ण बना लें और इस चूर्ण को गन्ने के रस में 1 महीने तक भिगोकर रखें। 1 महीने बाद इस लेप को लगाएं। रात को लगाकर सुबह बाल धोएं। यह प्रयोग हफ्ते में 2  बार करें। 
  • आंवलों का चूर्ण रात भर पानी में भिगो दे। सुबह उसे मसलकर छान लें और उस पानी से सिर धोएं। बाल काले और मुलायम होंगे। यह प्रयोग हफ्ते में 1 बार करें। 
  • सोते समय पैर के तलुवों में घी लगाकर मालिश करें। ऐसा करने से बालों का सफेद होना रुक जाता है। यह प्रयोग हफ्ते में 3 बार कर सकते है। 
  • आंवले के चूर्ण को पानी में घोलकर नींबू का रस निचोड़ लें। इस मिश्रण से रोजाना बाल धोएं। 
  • कम उम्र में ही बाल सफेद होने की समस्या से निजात पाने के लिए अखरोट की छाल 10 ग्राम, सफेद फिटकरी 2 ग्राम तथा बिनौले का तेल 250 ग्राम लेकर सबको एक साथ मिलाकर उबालें। जब अखरोट की छाल का पानी जल जाए तो उसे उतार कर रख लें। इस तेल को लगाने से सफेद बाल काले और घने होने लगते है। 
  • महाभृंगराज तेल या तिल का तेल अथवा नारियल का तेल रात को सोते समय सिर में लगाकर हल्के हाथों से धीरे-धीरे मालिश करें। हफ्ते में 3-4 बार ऐसा करने से बाल असमय सफेद नहीं होंगे। 
  • एक साबूत आंवला गर्म पानी में उबाल लें। थोड़ा ठण्डा होने के बाद आंवलें को दबाकर गुठली निकाल दे। गूदे में पीसी शक़्कर, जीरा, काली मिर्च और सेंधा नमक मिलाकर भोजन के साथ खाएं। इससे बालों को पोषण मिलता है और वह असमय सफेद नहीं होते। 
  • 1 किलो आंवलें का रस, 1 किलो देसी घी, 250 ग्राम मुलहठी इन तीनों को हल्की आंच पर पकाएं। जब पानी सूख जाए और घी बाकी रह जाए तो इसे एक बोतल में भरकर रख लें। इसे बालों में लगाएं। कुछ ही दिनों में बाल काले हो जाएंगे।  
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बेड़ा पूड़ी बनाने की विधि

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beda pudi

बेड़ा पूड़ी बनाने की सामग्री 

  • 250 ग्राम धुली मूंग की दाल 
  • 250 ग्राम मैदा 
  • अजवायन स्वादअनुसार
  • लाल मिर्च स्वादअनुसार
  • नमक स्वादअनुसार
  • जीरा स्वादअनुसार
  • हरी मिर्च हरा धनिया
  • तेल तलने के लिए  

 बेड़ा पूड़ी बनाने की विधि  

  1. रात को दाल गला कर सुबह महीन पीस लें। 
  2. पीसी हुई दाल में अजवायन छोड़ कर सारे मसाले मिला लें। 
  3. एक बर्तन में मैदा लें और चुटकी भर नमक जरा सी अजवायन व मोयन मिला कर गूंध लें। 
  4. मैदे की छोटी-छोटी लोई तोड़कर पतली पपड़ी की तरह बेले और बीच में एक छोटी चम्मच भर दाल की पीठी रख कर फैला दें।
  5. अब पपड़ी को चारों तरफ से आधा इंच के लगभग मोड़कर चौकोर शक्ल की पूड़ी बना लें। 
  6. कड़ाही में तेल गरम कर इस पूड़ी को इस तरह से तलने के लिए कड़ाही में डालें कि दाल वाला भाग ऊपर रहे। 
  7. थोड़ी सिक जाने के बाद इसे पलट कर अच्छी तरह सेंक लें। 
  8. पहले पूड़ी को दाल का भाग नीचे करके उलटी न डालें वरना दाल कड़ाही में फैल जाएगी। 
  9. सिक जाने पर गरम-गरम बेडा पूड़ी चटनी या सॉस के साथ परोसें। ये बहुत जायकेदार व्यंजन है। 
आपने मेरे इस आर्टिकल को पड़ा इसके लिए में आपका हार्दिक धन्यवाद करती हूँ। इसमें दिए गए व्यंजन की विधि को घर पर जरूर बना कर देखें और नीचे दिए गए कमेंट में सूचित करने की कृपा करें। 😊😊

त्वचा की देखभाल कैसे करें

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facepack

दोस्तों आज में अपने इस आर्टिकल में त्वचा की देखभाल कैसे करें के बारे में चर्चा करुंगी। चमकीली और सुन्दर त्वचा का सौंदर्य में सर्वोपरि स्थान है और इस तरह की त्वचा साधारण लड़की को भी आकर्षक व सुन्दर बना देती है। खूबसूरत त्वचा न केवल आपके सुन्दर होने का प्रमाण है बल्कि यह आपके स्वास्थ्य के बबारे में भी खबर देती है इसलिए कई चिकित्सक तो त्वचा की दशा से ही शरीर की रोगावस्था का अनुमान लगा लेते है।

त्वचा में कई रोमकूप होते है जिनके जरिये पसीना निकलता है और प्रकृति शरीर की सफाई करती रहती है अतः यह बहुत जरूरी है कि हमारे रोमकूप बराबर साफ रहे, अन्यथा मुंहासे या अन्य त्वचा संबधी रोग उतपन्न होने लगेंगे। इस उद्देश्य की पूर्ति के लिए यदि आप कभी-कभी भापस्नान (स्टीमबाथ)ले सकें तो बड़ा अच्छा रहेगा पसीना निकालने के उद्देश्य से यदि आप सुबह की सुहाती धूप में 1 घंटा बैठ सकें तो आपकी त्वचा के लिए बहुत लाभकारी होगा क्योंकि सूर्य की किरणों में विटामिन 'D' होता है।

बहुत सी महिलाएं अत्यधिक कोस्मेटिक प्रसाधनों का प्रयोग करती है, जो कि त्वचा के लिए हानिकारक है। यही नहीं अधिकांश महिलाएं रात में बिना मेकअप साफ किये ही सो जाती है। यह आदत त्वचा को नुकसान पहुंचाती है। रात को सोने से पूर्व गुनगुने पानी से हाथ पैर व मुंह धोना आवश्यक है।

साधारणतः त्वचा तीन प्रकार की होती। 

  1. शुष्क (रूखी) त्वचा - शुष्क त्वचा के नीचे तैलीय ग्रंथियां निष्क्रिय हो तो त्वचा में रूखापन व्याप्त हो जाता है अतः ऐसी त्वचा की सफाई में साबुन का उपयोग कम करना चाहिए और करना ही हो तो ग्लीसरीन युक्त साबुन का उपयोग करना चाहिए। शुष्क त्वचा में झुर्रिया जल्दी दिखाई देने लगती है इसलिए इसकी अच्छी देखभाल की जरूरत होती है। त्वचा में तेल की कमी हो जाने से, पानी कम पीने से या फिर बचपन से ही रूखी होती है। इसलिए जरूरी है कि ऐसी त्वचा को पूर्ण पोषण दिया जाए। 
  2. चिकनी (ऑयली) त्वचा - चिकनी त्वचा के अन्दर तैलीय ग्रंथिया अत्यधिक सक्रिय होती है खासकर चेहरे की त्वचा पर। ऐसी त्वचा पर मुंहासे अधिक निकलते है अतः ऐसी त्वचा पर चिकनी क्रीम, मलाई आदि कभी मत लगाइए बल्कि दिन में दो बार गुनगुने पानी और अच्छे साबुन से चेहरा धोकर थपथपा कर सुखाइए फिर इस पर चिकनाहट रहित क्रीम या खीरे का रस लगाइए। नींबू के रस का प्रयोग भी ऐसी त्वचा पर फायदेमन्द हो सकेगा। ऐसी त्वचा युक्त चेहरे पर हफ्ते में एक बार भाप लीजिए। इससे आपके रोमछिद्र खुल जाएंगे और रक्त संचालन अच्छा होगा।
  3. मिश्रित (कॉम्बिनेशन) त्वचा -मिश्रित त्वचा सामान्य त्वचा कहलाती है। सामान्य त्वचा न रूखी होती है और न ही तैलीय होती है इसी वजह है ऐसी त्वचा का फायदा ये होता है की आपको कुछ भी यूज करने से पहले सोचना नहीं होता। इसका ज्यादा ख्याल नहीं रखना पड़ता लेकिन इसको भी देखभाल की जरूरत होती है।

शुष्क (रूखी) त्वचा के लिए फेस पैक 

    1. 3 चम्मच एलोविरा जेल में 1 चम्मच बादाम का तेल मिला लें और अच्छी तरह मिक्स कर लें और इसे अपनी त्वचा पर लगाए। 15 से 20 मिनट या सूखने के बाद इसे सादे पानी से साफ कर लें। 
    2. नहाने से पहले 3 चम्मच ऑलिव ऑयल में 3 चम्मच बादाम का तेल मिक्स करके त्वचा पर लगाए और एक या आधे घण्टे बाद नहाने जाए इसको आप सर्दी या गर्मी दोनों ही मौसम में लगा सकते है 
    3.  1 पके हुए केले के गूदे में 1 चम्मच शहद और कुछ बूंदे ऑलिव ऑयल की मिलाए और मिक्स कर लें। इस मिश्रण को त्वचा पर लगाए और 10 मिनट बाद सादे पानी से धो लें। 
    4. 2 चम्मच दही में जरा सा शहद और कुछ बूंदे गुलाबजल की मिलाए। इस पैक को त्वचा पर लगाए। फिर 10 से 15 मिनट बाद सादे पानी से धो लें। 
    5. 2 चम्मच कॉर्न फ्लोर, 1 चम्मच नींबू का रस, 2 चम्मच दही इन सब को मिलाकर पैक तैयार कर लें और त्वचा पर लगाए और सूखने के बाद ठंडे पानी से धो लें।

चिकनी (ऑयली) त्वचा के लिए फेस पैक

  1. 1 चम्मच चंदन का पाउडर, 2 बूंद गुलाबजल, 2 चम्मच बेसन और 1 चुटकी हल्दी इन सबको जरा सी मलाई डाल कर मिक्स कर ले और फेस व गर्दन पर लगा कर छोड़ दे सूखने के बाद इसे ठंडे पानी से धो लें। इस पैक को सप्ताह में 1 बार ही लगाए।
  2. 1 चम्मच संतरे के पाउडर (संतरे के छिलकों को धुप में सूखा कर पीस लें) में 1 चुटकी हल्दी और जरा सा दूध मिलाकर पैक तैयार कर लें और 15 से 20 मिनट तक चेहरे पर लगाए रखें। फिर ठंडे पानी से धो लें 
  3. 2 चम्मच मुल्तानी मिट्टी, 1 चम्मच एलोवीरा जेल और 2 चम्मच कच्चा दूध इन सब चीजों को मिक्स कर लें। इस पैक को सिर्फ गर्मियों में ही लगाए। इसे हफ्ते में 2 या 3 बार ही लगाए। इस पैक को सूखने के बाद साफ कर लें। 
  4. 2 चम्मच दही, 1 चम्मच मुल्तानी मिट्टी और 1 चम्मच नींबू का रस इन सबको मिक्स करके पैक तैयार करें। अब इसे चेहरे पर 10 से 15 मिनट तक लगाए और ठंडे पानी से धो लें। 
  5. 1 चम्मच बेसन, 1/2 चम्मच हल्दी इन दोनों को पानी दाल कर मिक्स करें और इस पैक को 15 से 20 मिनट तक लगाए और धो लें। 

मिश्रित (कॉम्बिनेशन) त्वचा के लिए फेस पैक 

  1. केला मैश किया हुआ और 2 चम्मच शहद दोनों को मिक्स कर लें और इस पैक को फेस पर लगा लें।  20 मिनट के बाद साफ कर लें। 
  2. 1 टमाटर को मैश करें और फेस पर लगा लें फिर 20 मिनट बाद फेस धो लें। 
  3. 1 चम्मच शहद, 1/2 हल्दी, 1 चम्मच मुल्तानी मिट्टी, 1 चम्मच गुलाबजल थोड़ा सा पानी मिक्स करने के लिए।अब इसका पेस्ट बनाकर फेस पर लगाए और 20 मिनट के बाद फेस धो लें। 
  4. आलू को कद्दूकस करके उसका रस निकाले फिर इसमें 1 चम्मच नींबू का रस मिलाए। इस पेस्ट को आप फेस पर लगाए और 20 मिनट के बाद चेहरा साफ कर लें। इससे मुहासों के दाग धब्बे दूर होते है और रंग भी निखरता है। 
  5. 1 चम्मच ओट्स में थोड़ा सा अंगूर का रस मिलाए। इस पैक को 20 मिनट तक लगाए रखें और फिर धो लें। इससे आपकी त्वचा मुलायम होती है। 
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Apple Service Center in RDC Raj Nagar Ghaziabad (QDIGI Services Limited)

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ODIGI Apple Service Center in Ghaziabad

दोस्तों गाज़ियाबाद में रहने वाले Apple iPhone users के लिए खुश खबरि है कि Apple service center RDC, Raj Nagar, Ghaziabad में खुल गया है।

मुझे तब पता चला जब में locate.apple.com पे आनंद विहार का एप्पल के सर्विस सेंटर में अप्पोइंटमेण्ट फिक्स करने के लिए सर्च कर रही थी। तो जब मैंने देखा की सर्विस सेण्टर मेरे नियर ही गाज़ियाबाद में है तो मुझे ये कनविनिएंट लगा।

नीचे है Apple सर्विस सेण्टर का नाम और पता।

QDIGI SERVICES LIMITED

C-6, GF, RDC, RAJ NAGAR,,
GHAZIABAD 201002

Phone: +91 9319177575

Apple Service Center RDC, Raj Nagar, Ghaziabad

अमरुद की जेली बनाने की विधि

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दोस्तों आज में इस आर्टिकल में अमरुद की जेली बनाने की विधि शेयर कर रही हूँ। जो की आप घर पर आसानी से बना सकते ये बनाने में बहुत आसान है और खाने में भी स्वादिष्ट होती है। तो लीजिए अमरुद की रेसिपी बनाने की विधि इस प्रकार है।

अमरुद की जेली बनाने की सामग्री  


  • 1 किलो अमरुद 
  • 250 ग्राम चीनी 
  • 3 टी स्पून नींबू का रस 

अमरुद की जेली बनाने की विधि 

  1. एक पतीले में गोल आकार में पतले कटे हुए अमरुद डाले।अब इसमें अमरुद के बराबर तक पानी डाले और तेज आंच पर 45 मिनट तक कुक करे। 
  2. अब अमरुद के पानी को स्टेनर की सहायता से छान लें। 
  3. अब अमरुद के पानी में चीनी डाल दे और आंच पर रखे और इस पानी को चीनी के घुलने  तक लगातार चलाते रहे। 
  4. चीनी घुलने के बाद तेज आंच पर कुक होने के लिए छोड़ दे और बीच-बीच में चलाते रहे। 
  5. जब पानी उबलने लगे तब इसमें नींबू का रस डालेऔर तेज आंच पर जेली को गाड़ा होने दे। 
  6. जब जेली गाड़ी हो जाए तब एक कटोरी में पानी लें और उसमें जेली की कुछ बूंद डाले अगर जेली जमने लगे तो जेली तैयार है। 
  7. जेली को ठंडा होने दे फिर इसको कांच की बोतल में डाल दे।
  8. इसे आप ब्रेड में लगाकर बच्चो को दे सकते है या रोटी पर लगाकर भी बच्चो को बहुत पसंद आती है। 

नोट 

  1. जब भी जेली बनाये तो बर्तन पतला न ले। 
  2. जेली बनाते समय उसे बीच बीच में चलाते रहें। 
  3. अगर आपको इसका कलर हल्का  लगे तो आप फ़ूड कलर का भी इस्तमाल कर सकते हो। 
आपने मेरे इस आर्टिकल को पड़ा इसके लिए में आपका हार्दिक धन्यवाद करती हूँ। इसमें दिए गए व्यंजन की विधि को घर पर जरूर बना कर देखें और नीचे दिए गए कमेंट में सूचित करने की कृपा करें। 😊😊

दांत दर्द में घरेलू उपचार

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tooth pain

दोस्तों आज में इस आर्टिकल में दांत दर्द में घरेलू उपचार के बारे में बताउंगी। दांतो की प्रतिदिन भली प्रकार सफाई और पर्याप्त मात्रा में कुल्ले न करने से दांत खराब, गंदे, कमज़ोर और पीड़ा के कारण होते है। साथ ही मसूड़े भी खराब हो जाते है। जिससे मुँह से बहुत बुरी दुर्गन्ध आती है और पायरिया जैसा भयंकर रोग हो जाता है। गन्दा और रोग ग्रस्त मुख सारे शरीर को रोगी बना देता है क्योंकि हम जो कुछ भी खाते पीते है व दूषित होकर ही उदर में पहुँचता है। इसलिए दांतो की सफाई और सुरक्षा करने में जरा भी लापरवाही नहीं करनी चाहिए। दोस्तों इसलिए में अपने इस आर्टिकल में कुछ सरल और लाभकारी उपाय प्रस्तुत कर रही हूँ।

दांत दर्द में घरेलू उपचार 

  1. लौंग और लौंग का तेल सबसे पुराना और असरदार घरेलू इलाज है। लौंग का तेल एक बून्द रुई में लेकर जिस दांत में दर्द हो रहा हो उस जगह लगाकर छोड़ दे तुरन्त आराम मिल जाएगा। अगर लॉन्ग का तेल न हो तो आप 1-2 लौंग मुँह में रखकर चबाए या जिस दांत में दर्द है उस जगह लौंग रखकर चबाने से तुरंत आराम मिलता है। क्योकि लौंग एंटी बैक्टीरियल होता है। 
  2. लहसुन भी बहुत लाभकारी नुस्खा है दांत दर्द में। क्योकि ये दांतो को बैक्टीरिया से बचता है साथ-साथ भोजन का स्वाद भी बढ़ाता है। आप लहसुन की 1-2 कलियां जिस दांत में दर्द हो रहा हो उस स्थान पर लगा लो या इसका पाउडर लगा लो इससे भी दर्द में आराम मिलता है। 
  3. बर्फ भी दांत दर्द को कम करने में लाभकारी सिद्ध होती है। अगर आपके दांत में दर्द हो रहा हो तो उस जगह पर या गाल के साइड से आइस-क्यूब की सिकाई करने से भी दांत दर्द में आराम मिलता है। 
  4. नमक वाला गुनगुना पानी का कुल्ला करने से भी दांत दर्द में बहुत आराम मिलता है क्योकि नमक के पानी से कुल्ला करने से मुंह में जमा गन्दगी बाहर निकल जाती है। 1 गिलास गुगुन पानी में 1 छोटा चमच्च नमक डाकर कुल्ला करें। ये भी बहुत लाभकारी दांत दर्द में घरेलू उपचार है।
  5.  कपूर हिंगुवटी को दांत के बीच दबाकर रखने से दांत दर्द में आराम हो जाता है। 
  6. अमरुद के पत्ते पानी में उबाल कर इस पानी से कुल्ला करने से दांत दर्द में आराम मिलता हैऔरअमरुद  के पत्तों को चबाने से भी लाभ होता है।
 दन्त व्याधि नष्ट करने के लिए आयुर्वेद में एक से बढ़कर एक शास्त्रीय नुस्खे भरे पड़े है जो बहुत गुणकारी सिद्ध हुए है पर इस आर्टिकल में वे ही उपचार प्रस्तुत है जो आप आसानी से घर पर प्रयोग कर सकते है।

आपने इस आर्टिकल को देखा इसके लिए आपका धन्यवाद करते है | इसमें दिए गए नुस्खो को प्रयोग कर परिणाम नीचे कमेंट में सूचित करने की कृपा करें | 😊😊

ईसबगोल का परिचय गुण और प्रयोग

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isabgol
दोस्तों आज में इस आर्टिकल में आपसे ईसबगोल का परिचय गुण और प्रयोग के बारे में बताऊंगी जो की बहुत लाभकारी है। अक्सर कब्ज़ होने पर खाये जाने वाले इसबगोल के बारे में आप सब जानते होंगे। पर क्या आप इसके परिचय, गुण और प्रयोग के बारे में जानते है। अगर नहीं जानते तो उम्मीद है की इस आर्टिकल में दी गयी जानकारी आपके लिए लाभकारी होगी। इसबगोल का परिचय, गुण और प्रयोग इस प्रकार है।

ईसबगोल का परिचय 

यह अशवगोल कुल (प्लांटाजिनेसी) की वनस्पति है। इसके बीजों की भूसी अलग करके औषधि के रूप में प्रयोग की जाती है। जो बाजार में सत ईसबगोल के नाम से पैकेटों में पैक मिलती है। इसका उल्लेख प्राचीनआयुर्वेदिक ग्रंथो में नहीं मिलता। इसका मूल उतपत्ति स्थान फारस है इसलिए यूनानी ग्रंथो में इसका विस्तृत विवरण मिलता है। भारत में यह पंजाब और उत्तर प्रदेश के कुछ भागों में और विशेष कर गुजरात प्रान्त में पैदा होती है आधुनिक खोज के अनुसार यह शीतल व शान्ति दायक है और अतिसार रक्तातिसार, पेचिश, अजीर्ण, मलावरोध, ज्वर और दमा रोग में बहुत गुणकारी है।

ईसबगोल के गुण 

ईसबगोल सनिग्ध, भारी, पिच्छिल, मधुर, ग्राही, शीतल वात कारक और पित्त कफ़ नाशक है। रक्तातिसार व रक्तपित्त नष्ट करता है। पेट के लिए बहुत लाभकारी है। यह आंतों के लिए और पेट में मरोड़ के लिए भी बहुत लाभप्रद है। ईसबगोल में कब्ज दूर करने का सबसे बड़ा गुण होता है। 

ईसबगोल का प्रयोग 

ईसबगोल कोष्ठ बद्धता (मलावरोध), पेट में मरोड़ या खुश्की को मिटाती है। पेट साफ रखती है। अतिसार, पेचिश, आंवयुक्त दस्त, पुरानी पेचिश, आंतो के घाव, शवासकष्ट, दमा और ज्वर के लिए बहुत उपयोगी है और पानी के साथ या पानी में गलाकर 2-3 घंटे रखने के बाद फूल जाने पर सेवन की जाती है। यह शक़्कर के साथ लेने पर मूत्र विकार, मूत्राशय, मूत्रनली और वृक्क की पीड़ा में आराम करती है। कब्ज की शिकायत होने पर इसे दूध के साथ लिया जाता है दस्त लगने व पेचिश होने पर इसे ताजे दही के साथ लिया जाता है। इसे लेने की मात्रा 5 से 10 ग्राम है।

नोट 

ईसबगोल का अधिक लम्बे समय तक सेवन करने से अग्नि मांघ होने लगता है जिसका निवारण करने के लिए द्राशसव का प्रयोग करना चाहिए।

आपने इस आर्टिकल को देखा इसके लिए आपका धन्यवाद करते है | इसमें दिए गए नुस्खो को प्रयोग कर परिणाम नीचे कमेंट में सूचित करने की कृपा करें | 😊😊

अदरक के गुण और उपयोग

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Ginger
 दोस्तों आज में अपने इस आर्टिकल में अदरक के गुण और उपयोग के बारे में बताऊंगी। दोस्तों हमारी रसोई में जो भी खाद्य पदार्थ है वे सभी किसी न किसी रोग में उपयोगी सिद्ध होते है बशर्ते हमें उनके गुण लाभ औरउपयोग के विषय में जानकारी हो। अदरक से सभी परिचित है। शीतकाल में शाक सब्ज़ी के मसलों में अदरक का हल्की सी मात्रा में उपयोग होता है। चाय में अदरक डाली जाती है। और चटनी बनाते समय भी अदरक का प्रयोग किया जाता है। इसलिए मैने सोचा क्यों न आपके साथ आज में अदरक की उपयोगिता और गुण शेयर करू जो की हम अपनी रसोई में रोज इस्तमाल करते है उम्मीद करती हूँ की ये आर्टिकल आपको पसन्द आए।

अदरक के गुण

अदरक मल भेदक, भारी, तिष्ण, गरम, चरपरा पाक में मधुर तथा वात व कफ को नष्ट करता है। सोंठ के गुण अदरक में भी होते है। भोजन से पहले नमक के साथ अदरक खाने से रूचि, भूख, जठरागिन और पाचन शक्ति बढ़ती है, जीभ और कंठ का शोधन होता है। जिन्हें कुष्ठ पाण्डु, कुच्छर, रक्तपित्त, घाव, ज्वर दाह रोग से ग्रस्त रोगी को तथा ग्रीष्म और शहद ऋतु में अदरक का सेवन वर्जित है।

अदरक के उपयोग 

रसोई सम्बन्धी उपयोग के अलावा अदरक को औषधिय ढंग से भी नाना प्रकार की व्याधियों को नष्ट करने के लिए उपयोग में लिया जाता है। कुछ बहुत उपयोगी प्रयोग यहां प्रस्तुत किये जा रहे है।
  1. अदरक को बारीक़ काटकर उस पर थोड़ा नमक बुरक लें। इसे भोजन के साथ खाने से भूख खुलती है और पाचन अच्छा होता है। 
  2. अदरक का रस और शहद बराबर मात्रा में मिलाकर शीशी में रख लें। दिन में दो बार इसे सुबह व शाम चाटने से खांसी में आराम होता है। सर्दी जुकाम व बैठे हुए गले में लाभ होता है।
  3.  अदरक को बारीक-बारीक कतर कर कटोरी में रखे और एक टुकड़ा गुड़ डाल कर आग पर रख दे। थोड़ी देर में गुड़ पिघलने लगेगा तब चमच्च से गुड़ को हिलाकर मिलालें। जब अच्छी तरह पिघल कर दोनों पदार्थ पिघल जाए तो उतार लें। इसे थोड़ा गरम 1 या 2 चमच्च चाटने से कफ़ युक्त खांसी में आराम होता है। इसे खाने के 1 घण्टे बाद तक पानी नहीं पीना चाहिए। या सोते समय चाटकर कुनकुने गरम पानी से कुल्लाकर मुँह साफ करके सो जाना चाहिए बहुत लाभप्रद उपाय है। 
  4. उल्टी रोकने के उपाय में अदरक बहुत गुणकारी होता है। अदरक का रस 1 चमच्च लेकर जरा सा सेंधा नमक व काली मिर्च बुरक लें और चाट लें। आवश्यकता पड़े तो घण्टे भर बाद 1 खुराक और ले लें। 
  5. पतले दस्त लग रहे हो तो 1 कप पानी गर्म कर उबाल लें। उबाल आने पर पानी एक कप में डाल लें और इसमें एक चमच्च अदरक का रस डाल कर जितना गरम पी सके उतना गरम पी लें। दिन में 2 या 3 बार इस उपाय को करने से दस्त बन्द हो जाते है। 
  6. अदरक के बारीक़ टुकड़े कर चूसने से हिचकी फौरन बन्द होती है। इसके साथ ही घी मिलाकर खाने या अदरक का रस निकल कर 1-1 चमच्च सुबह शाम चाटने से वात प्रकोप और वात शूल में आराम होताहै। 
  7.  अदरक 500 ग्राम किसा हुआ और अच्छी मात्रा में नींबू का रस,  काली मिर्च व सेंधा नमक मिलाकर अच्छी तरह हिलाकर मिक्स कर लें। अब इन टुकड़ों को साफ कपड़े पर फैला कर धूप में रखकर अच्छी तरह से सूखा लें। इसका 1 टुकड़ा मुंह में रखकर चूसे। इसके सेवन से बैठा हुआ गला ठीक होता है, खांसी व कफ विकार में लाभ होता है, भूख खुलती है पाचन अच्छा होता है और मसूड़ों को लाभ होता है। 

नोट 

ग्रीष्म ऋतु, कवार के मास में, रक्त पित्त और पीलिया रोग में तथा शरीर की तासीर बहुत गर्म होने पर अदरक का सेवन वर्जित है।

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Computer Keyboard Shortcuts Meaning

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Keyboard shortcuts.
दोस्तों आज में आपसे कंप्यूटर कीबोर्ड शॉर्टकट मीनिंग शेयर कर रही हूँ। उम्मीद है की ये जानकारी आपको  पसन्द आएगी । ये संक्षिप्त शब्दों को हम ज्यादातर अपने कंप्यूटर पर  अक्सर इस्तमाल करते है। इसकी शोर्ट फॉर्म तो अक्सर हम सब लोगों को पता होती है पर ज्यादातर इसकीफुल फॉर्म हमें पता नहीं होती। तो आइये जानते है कुछ संक्षिप्त शब्दों की फुल फॉर्म जो की इस प्रकार है। 

 1 Ctrl + V 

पेस्ट दा सलेक्टेड आईटम

2 Ctrl + C

कॉपी दा सलेक्टेड आईटम

3 Ctrl + Z

अनडू एन एक्शन

4 Ctrl + X

कट दा सलेक्टेड आइटम

5 Alt + Tab

स्विच बिटवीन ओपन ऐप्स

6 Alt + F4

क्लोज दा एक्टिव आईटम,और एग्जिट दा एक्टिव ऐप्स

7 Alt + F8

शो योर पासवर्ड ऑन

8 Ctrl + A

सलेक्ट ऑल आईटम इन अ डॉक्यूमेंट और विन्डो

9 Ctrl + F4

क्लोज दा एक्टिव डॉक्यूमेंट

10 Ctrl + D

डिलीट दा सलेक्टेड आईटम एंड मूव इट टू दा रिसाईकल बिन 

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व्रत में बनाए फलहारी बूंदी (नुक्ती)

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Boondi (nukti)
दोस्तों आज में आपको अपने इस आर्टिकल में व्रत में बनाए फलाहारी बूंदी (नुक्ती) बनाने की रेसिपी शेयर करुंगी। आपने बेसन की बूंदी तो अक्सर खाई और बनाई होगी। पर क्या कभी फलाहारी बूंदी का भी जायका चखा है? यदि नहीं तो अब बनाइए और देखिए कितनी स्वादिष्ट लगती है। इस व्यंजन को आप व्रत में खा सकते है। तो आइए इसे बनाने की सामग्री और विधि इस प्रकार है।

व्रत में फलहारी बूंदी (नुक्ती)बनाने की सामग्री 

  • 50 ग्राम सिंघाड़े का आटा 
  • 50 ग्राम अरबी 
  • 100 ग्राम अरारोट 
  • 12 5 ग्राम शक्कर 
  • घी तलने के लिए

व्रत में फलहारी बूंदी (नुक्ती) बनाने की विधि 

  1. सबसे पहले एक बर्तन में अरबी को उबाल लें। 
  2. अब अरबी को छीलकर उसमें सिंघाड़े का आटा मिलाले और अरारोट मिलाकर मसल लें व खूब फेटे। 
  3. अब अलग बर्तन में चीनी की तीन तार की चाशनी बनाकर रख लें। 
  4. अब कढ़ाही में घी गर्म करके बूंदी निकाल लें। इसको आप टिक्की का आकार भी दे सकते है। 
  5. अब चीनी की चाशनी में इस बूंदी को डाल दे ध्यान रखें की चाशनी गर्म न हो। 
  6. लीजिये तैयार है गरमा गर्म बूंदी (नुक्ती) .यह एक मीठा और स्वादिष्ट व्यंजन है। 
आपने मेरे इस आर्टिकल को पड़ा इसके लिए में आपका हार्दिक धन्यवाद करती हूँ। इसमें दिए गए व्यंजन की विधि को घर पर जरूर बना कर देखें और नीचे दिए गए कमेंट में सूचित करने की कृपा करें। 😊😊

व्रत में साबूदाने के दहीबड़े

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Dahi vada
दोस्तों आज में इस आर्टिकल में आपके साथ व्रत में साबूदाने के दहीबड़े की रेसिपी शेयर करुंगी। जो की बनाने में आसान है और जल्दी भी बन जाती है। साबूदाने की खिचड़ी या और भी इससे बने व्यंजन आपने खाए और बनाए होंगे। इस व्यंजन को आप व्रत में भी खा सकते हो। साबूदाना हल्का होने के कारण पचाने में भी आसान होता है। साबूदाने के दहीबड़े बनाने की विधि इस प्रकार है।

व्रत में साबूदाने के दहीबड़े बनाने की सामग्री 

  • 100 ग्राम साबूदाना 
  • 100 ग्राम मूंगफली के दाने 
  • 100 ग्राम आलू 
  • 300 ग्राम दही 
  • काली मिर्च, हरी मिर्च, सेन्धा नमक अन्दाज से। 
  • तेल तलने के लिए 
  • हरा धनिया

व्रत में साबूदाने के दहीबड़े बनाने की सामग्री 

  1. एक बर्तन में साबूदाना गला दे। 
  2. एक कढ़ाही में मूंगफली के दाने भून लें।
  3. कुकर में आलू उबाल कर छील लें।
  4.  अब एक बर्तन में इन तीनों चीजों को मसाला डालकर पीस लें और मिश्रण तैयार करें। 
  5. अब इस मिश्रण के गोल बड़े बनाकर तेल में तल लें और टिशू पेपर पर रखें।
  6. अब एक बर्तन में दही और नमक डालकर अच्छी तरह फेट लें और इस फेटे हुए दही में ठंडे साबूदाने के बडे डाल दे.( अगर बड़े हार्ड हो तो थोड़े गुनगुन पानी में 5 मिनट डाल दे और फिर दही में डालें) और ऊपर से बारीक़ कटा हुआ हरा धनिया डाल कर फ्रिज में ठंडा करने रख दे
  7. लीजिये साबूदाने के ठंडे दहीबड़े तैयार है सर्व करने के लिये। 
आपने मेरे इस आर्टिकल को पड़ा इसके लिए में आपका हार्दिक धन्यवाद करती हूँ। इसमें दिए गए व्यंजन की विधि को घर पर जरूर बना कर देखें और नीचे दिए गए कमेंट में सूचित करने की कृपा करें। 😊😊

व्रत में बनाए फलाहारी पकौड़े

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falahari pakode
 दोस्तों आज में अपने इस आर्टिकल में व्रत में बनाए फलाहारी पकौड़े की रेसिपी शेयर कर रही हूँ। जो की आप नवरात्र में भी खा सकते हो। आजकल तो वैसे भी नवरात्र चल रहे है। हम अक्सक सोचते है कि क्या बनाए क्या न बनाए। ये खाने में भी बहुत स्वादिष्ट होते है। इसको आप सुबह के नाश्ते में या रात के भोजन में लें सकते है। तो लीजिए इस फलाहारी पकौड़े की विधि इस प्रकार है।

व्रत में बनाए फलाहारी पकौड़े की सामग्री  

  • 50 ग्राम सिघाड़े का आटा 
  • 100 ग्राम आलू 
  • सेंधा नमक स्वादनुसार 
  • काली मिर्च स्वादनुसार 
  •  तलने के लिए घी 

व्रत में बनाए फलाहारी पकौड़े की विधि 

  1. सबसे पहले कुकर में आलू उबाल लें। 
  2. फिर एक बर्तन में उबले हुए आलू छील कर पीस लें। 
  3. अब पीसे हुए आलू में सिघाड़े का आटा, कालीमिर्च और नमक मिलाकर खूब फेट लें अगर जरूरत पड़े तो आवश्यकता अनुसार पानी भी मिला सकते है। ये ऑप्शनल है। 
  4. अब एक कढ़ाही में घी गर्म करें और पकौड़ो की तरह तल लें। 
  5. एक टिशू पेपर पर तले हुए पकौड़ो को निकाल लें और गरमा गर्म पकौड़ो को चाय या धनिया की चटनी के साथ सर्व करें।
  • आपने मेरे इस आर्टिकल को पड़ा इसके लिए में आपका हार्दिक धन्यवाद करती हूँ। इसमें दिए गए व्यंजन की विधि को घर पर जरूर बना कर देखें और नीचे दिए गए कमेंट में सूचित करने की कृपा करें। 😊😊

व्रत में बनाए फलाहारी मालपुआ

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Maalpua

दोस्तों आज में अपने इस आर्टिकल में व्रत में बनाए फलाहारी मालपुआ की रेसिपी शेयर कर रही हूँ जो की बहुत ही आसान है। व्रत उपवास के समय अक्सर स्वादिष्ट और मजेदार व्यंजनों के बारे में सोचना पड़ता है। यह रेसिपी एक स्वीट डिश है जो की खोए से बनती है। इस फलाहारी मालपुआ की विधि इस प्रकार है।

 फलाहारी मालपुआ बनाने की सामग्री 

  • 150 ग्राम खोआ (मावा)
  • 25 ग्राम अरारोट 
  • 100 ग्राम चीनी 
  • 2-4 छोटी इलायची पीसी हुई। 
  • मिल्क आवश्कता अनुसार।
  • घी तलने के लिए।

फलाहारी मालपुआ बनाने की विधि

1 खोए को मसलकर बारीक़ करें। 
2 फिर इसमें अरारोट और थोड़ा दूध मिलालें । 
3 अब इसमें पीसी हुई इलायची मिलालें। 
4 अब एक कढ़ाही में घी डालकर गैस पर गर्म करें। 
5 अब करछी की सहायता से इस मिश्रण को पूड़ी की शक्ल में फैला कर कढ़ाही में डालें और उल्ट पलट कर सेक कर निकाल लें। 
6 अब शक़्कर की चाशनी 2 तार की बनाकर अलग रख लें। 
7 इस चासनी में पूड़ियों को डाल दे। 
8 15 से 20 मिनट तक चासनी में इन पूड़ियों को तर होने दे। 
9 ये लीजिये गरमा गर्म फलाहारी मालपुआ तैयार है।

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स्वास्थ्य के लिए व्यायाम का महत्व

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Importance of exercise for health.

दोस्तों आजकल की भागदौड़ में हम अपने स्वास्थ्य के लिए व्यायाम का महत्व भूल गए है। अच्छा स्वास्थ्य महावरदान होता है। अच्छे स्वास्थ्य से ही अनेक प्रकार की सुख सुविधाएं प्राप्त की जा सकती है। परन्तु आजकल मनुष्य अनेक प्रकार की बीमारियों का शिकार बन रहा है। आपने तो सुना ही होगा कितने लोग दिन प्रतिदिन खतरनाक बीमारियों के शिकार बन रहे है। इन बीमारियों से बचने के उपाय यह है कि प्रतिदिन व्यायाम करना चाहिए, स्वस्थ भोजन खाना चाहिए और वातावरण को साफ सुथरा रखना चाहिए। व्यायाम इनमे से सबसे मुख्य उपाय है। व्यायाम करने से हमारा शरीर चुस्त और फुर्तीला बनता है। व्यायाम अनेक प्रकार के होते है। जैसे प्रातः भृमण, दौड़ना, खेल कूद, योगासन, तैराकी आदि प्रमुख व्यायाम है।

(1) प्रातः भृमण व्यायाम का महत्व 

प्रातः भृमण व्यायाम शरीर के लिए बहुत उपयोगी है। अगर हम प्रातः काल सूरज निकलने से पहले टहलने जाए क्योकि इस समय का वातावरण शुद्ध होता है।सुबह जल्दी उठना कितना लाभकारी है ये तो हम सब जानते है। जल्दी उठने से हमारे काम भी जल्दी खत्म हो जाते और और जो बच्चे पढ़ाई करने वाले है वे भी अगर जल्दी उठकर पढ़ते है तो उन्हें जल्दी से याद हो जाता।  व्यायाम खुली हवा में खाली पेट करना चाहिए और उसके तुरन्त बाद स्नान भी करना चाहिए विद्याथियों को व्यायाम की आदत डालनी चाहिए।

(2) दौड़ना व्यायाम का महत्व 

दौड़ना व्यायाम भी शरीर के लिए बहुत ही आवश्यक है। आजकल तो पॉलुशन की वजह से लोग ट्रेडमिल पर दौड़ने लगे है। इसके भी की फायदे है अगर बारिश हो रही हो तो भी आपका व्यायाम नहीं रुकता। आप चाहे तो बाहर जाकर JOGGING TRACK पर दौड़ सकते है क्योंकि बाहर जाकर दौड़ना ट्रेडमिल पर दौड़ने से ज्यादा लाभकारी होता है। क्योकि एक तो आपको सुबह की ताजी हवा मिलती है और दूसरा आपको प्रकृति का सुन्दर हरा भरा नज़ारा देखने को मिलता है। पार्क में बिना चप्पल के घास पर चल सकते हो जिसके कई फायदे होते है जैसे आंखो की रोशनी बढ़ती है, तनाव रहित होते है, ब्लड प्रेशर कंट्रोल में रहता है आदि।

(3) खेल कूद व्यायाम का महत्व 

आज के समय में बच्चो पर पढ़ाई का बोझ इस कदर बढ़ गया है की उनके जीवन में खेल कूद का समय ही नहीं बचता। बच्चे स्कूल से घर, घर से TUTION और फिर HOME WORK इसी में इतना BUSY हो जाते है। इसलिए माता पिता को चाहिए की उनको खेलने से रोके नहीं बल्कि वे खुद उनके साथ खेले चाहें तो इनडोर GAME या आउटडोर GAME क्योकि बच्चो के सम्पूर्ण विकास के लिए बहुत आवश्यक है। खेल कूद से बच्चे का शारीरिक और मानसिक विकास होता है। शरीर हुष्ट पुष्ट और बलवान बनता है। सिर्फ बच्चे ही नहीं अगर बड़ो को भी गेम्स पसन्द हो तो वो भी किसी भी खेल कूद का हिस्सा बन सकते है जैसे बैडमिंटन, क्रिकेट, स्नूकर, चैस, स्कैटिंग आदि।

(4) योगासन व्यायाम का महत्व 

योगासन व्यायाम हमें शारीरिक मानसिक रूप से तथा शवसन में लाभ देता है। जब आप अच्छे विचारो को अपने मन में लाते हो तो जीवन की गाड़ी शांति, ख़ुशी और अधिक ऊर्जा से भरी होती है। तब आप पूर्ण रूप से स्वस्थ होते हो यह जीवन की गतिशीलता बताती है की आप कितने प्रेम, ख़ुशी और ऊर्जा से भरे हो। इससे नियमित रूप से कई लाभ होते है। सूर्य नमस्कार और कपालभाति प्राणायाम योगासन शरीर के वजन में कमी लाते है। सारा दिन में कुछ मिनट किया हुआ योगासन दिनभर की परेशानियों से मुक्ति दिलाता है। ये हमे अन्दरूनी शांति देता है। योगासन हमें भूत भविष्य से हटाकर वर्तमान समय में लाता है जिससे हम प्रसन्न होकर अपने लक्ष्य की और बढ़ते है।

(5) तैराकी व्यायाम  का महत्व

तैराकी शरीर के लिए एक अच्छा व्यायाम है। तैराकी के द्वारा हमारे पुरे शरीर की ताकत लगती है जिससे हमारे शरीर की मांसपेशिया बढ़ती और मजबूत होती है। शरीर की कैलोरी कम होती है। प्रतिदिन आधे घंटे तैराकी करने से महिलाओं को हार्ट डिजीज होने का खतरा 25 से 50% तक कम हो जाता है। तैराकी तनाव में भी बहुत लाभकारी है। इससे आपके पूरे शरीर की एक्सरसाइस हो जाती है।

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Full Forms of Some Important Abbreviations

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Full forms of some important abbreviations.

दोस्तों आज में आपसे कुछ जरूरी संक्षिप्त शब्दों की FULL FORM शेयर कर रही हूँ। उम्मीद है ये आपको HELP FULL लगेंगी और पसन्द आएगी। ये संक्षिप्त शब्दों को हम ज्यादातर अपने कार्यो में अक्सर इस्तमाल करते है। इसकी SHOT FORM तो अक्सर हम सब लोगों को पता होती है पर ज्यादातर इसकी FULL FORM हमें पता नहीं होती। तो आइये जानते है कुछ संक्षिप्त शब्दों की FULL FORM जो की इस प्रकार है। 

(1) IFSC

Indian Financial System Code

(2) RTO

Regional Transport Office

(3) ATM

Automated Teller Machine

(4) VAT

Value-Added Tax

(5) PIN

Personal Identification Number

(6) NOC 

Non Objection Certificate

(7) PAN

Permanent Account Number

 (8) ISI

Indian Standard Institute

(9) POA

Power of Attorney

(10) PSU

Public Sector Units

(11) RTI

Right To Information

(12) PSK

Passport seva Kendra

(13) UIDAI 

Unique Identification Authority Of Indian

(14) GPS

Global Positioning System

(15) CCTV

Closed Circuit Television

(16) PNG

Portalbe Network Graphics

(17) DVD

Digital Video Disk

(18) IP

Internet Protocol

(19) HDMI

High-Definition Multimedia Interface

(20) SD CARD

Secure Digital Card

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जीवन में परिश्रम और अच्छी आदतें ही सफलता की कुंजी है।

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Key to the success.

दोस्तों जीवन में परिश्रम और अच्छी आदतें ही सफलता की कुंजी है।दोस्तों आज के समय हर व्यक्ति उन्नत्ति करना चाहता है। ये कोई बुरी बात नहीं है। सफलता सब को प्रिय होती है।जब व्यक्ति परिश्रम करता है तब उसे सफलता मिलती है.एवं वो अपने जीवन में आगे बढ़ता है।जो लोग आलसी होते है वे सदैव अपना आज का काम कल पर छोड़ देते है और कल कभी नहीं आता।ऐसे लोग सपने तो देखते है पर सपनों को सच करने के लिए प्रयास कभी नहीं करते। ऐसे लोग अपनी सफलता या असफलता को केवल भाग्य से जोड़ देते है।

 परिश्रम सफलता की कुंजी है।

सफलता प्रतेक व्यक्ति को अच्छी लगती है।परन्तु सफलता केवल उन लोगों को मिलती है जो उसे पाने के लिए मेहनत करते है एवं भाग्य का सहारा नहीं लेते है।चींटी देखने में इतनी छोटी होती है पर मेहनत करने में कभी पीछे नहीं रहती है।

चिड़िया मेहनत करके सुन्दर सा घोंसला अपने लिए बनाती है।तब क्या हम लोग मेहनत करके आगे क्यों नहीं बढ़ सकते।हमें हमारी टीचर स्कूल में अच्छे से पढ़ाती है एवं सब बच्चों को एक सा पढ़ाती है पर सारे बच्चे पढ़ाई में अच्छे नहीं होते क्योंकि जो मेहनत करेगा वो बच्चा पढ़ने में अच्छा होगा।

इसलिए हम सभी को अपना सारा कार्य खूब परिश्रम से करना चाहिए एवं आलस्य को छोड़ना चाहिए ताकि हम अपने सपनों को पूरा कर सके और जीवन में आगे बढ़ सकें।ईश्वर भी उसी की मदद करता है जो स्वयं अपनी मदद करता है।

अच्छी आदतें सफलता की कुंजी है। 

मानव जीवन में अच्छी आदतों का बड़ा महत्व है।कोई व्यक्ति जो की अच्छी आदतों को अपने व्यवहार में नहीं ला पाता है वह जीवन में स्थायी सफलता नहीं पाता है।पुराने समय से आज तक संसार में कई ऐसे व्यक्तियों के नाम आगे आये जिन्होंने अपने अच्छे व्यवहार से लोगों का दिल जीत लिया और देश व संसार में प्रसिद्ध हुए।उन व्यक्तियों का नाम आज भी लोग प्रेम से याद करते है।जैसे संत कबीर, गोस्वामी तुलसीदास, मैरी वार्ड, मदर टेरेसा, सरोजनी नायडू, आचार्य विनोबा भावे, फ्लोरेंस नाइटिंगेल आदि। 

अच्छी आदतों के बिना मनुष्य एक पशु के समान समझा जाता है।जिस प्रकार पशु अच्छे और बुरे कार्य समझें बिना एक दिशा में भागते है।उसी प्रकार अच्छी आदतों से विहीन मनुष्य अपने मन की करता है और लोगों के बीच मज़ाक का केंद्र बनता है। 

एक बार मदर टेरेसा, जो की अपने सेवाभाव के लिए प्रसिद्ध थी, से पूछा गया की बीमार व्यक्तियों की सेवा करने में उन्हें किसी तरह की घृणा का एहसास क्यों नहीं होता है? और उनका जवाब था की ऐसे व्यक्तियों की सेवा करने से उन्हें ये लगता है कि वह ईश्वर की सेवा कर रही है। 

संत कबीर, जो की अपनी दयालुता एवं सादगी के लिए प्रसिद्ध है, ने एक जरूरतमन्द व्यक्ति को अपने हाथ के बुने हुए सूत की पूरी गठरी दे दी थी।मैरी वार्ड ने जीवन के तमाम सुख एवं साधनों को छोड़कर नारी जाती को ऊपर उठाने के लिए एक 'नन' बनना स्वीकार कर लिया। 

आचार्य विनोबा भावे ने जरूरतमन्दो को भूमि दान करके बेरोजगारी दूर करने की कोशिश की।सरोजनी नायडू ने अपनी सुंदर कविताओं एवं मधुर गायन से भारतीय जनता में देश प्रेम की भावना जगायी।फ्लोरेंस नाईटिंगेल ने घायलों एवं बीमारों के संघर्ष को अपने सेवा भाव से आसान बनाने की कोशिश की। 

इस प्रकार अपनी अच्छी आदत एवं अच्छे व्यवहार से व्यक्ति जीवन की ऊँचाइयों पर पहुंच कर लोगों के मन में एक विशेष जगह बना लेता है और लोग हमेशा उसकी सहायता करने को तैयार रहते है।

आपने इस आर्टिकल को पढ़ा इसके लिए आपका धन्यवाद करते है | कृपया अपनी राये नीचे कमेंट सेक्शन में सूचित करने की कृपा करें | 😊😊

मखाने की खीर

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Makhane ki kheer

दोस्तों आज में अपने इस आर्टिकल में आपको मखाने की खीर बनाने की विधि बताऊगी जो की बहुत स्वादिष्ट और पौष्टिक होती है। आजकल तो वैसे भी नवरात्रि का समय चल रहा है इस समय तो जी भी 9 दिन तक व्रत रखते है वो व्रत वाला भोजन ही खाते है। मखाने बहुत सारे पोषक तत्वों से भरपूर होते है और थकावट को मिटाकर शरीर को ऊर्जा देते है यह शरीर को स्वस्थ व निरोग बनाने में भी लाभकारी है। मखाने में कैलोरी की मात्रा कम होने की वजह से वजन घटाने में भी लाभकारी होता है। मखाने की खीर बनाने की विधि इस प्रकार है

मखाने की खीर बनाने की सामग्री 

1 कप मखाना 
1 टीस्पून घी 
4 कप दूध 
1 टेबल स्पून चीनी 
1/2 टी स्पून इलायची पाउडर 
1 टी स्पून पिस्ता, बारीक़ लम्बे टुकड़ो में कटा हुआ। 
थोड़ा सा केसर 

मखाने की खीर बनाने की विधि 

  1. एक बर्तन में घी गर्म कर लें और उसमें मखाने डाल कर भुने। 
  2. फिर भुने हुए मखाने को मिक्सी में दरदरा पीस लें और बाउल में डालकर अलग रख दें। 
  3. अब दूसरे बर्तन में दूध उबाले और इसमें मखाने मिलाए और धीमी आंच पर पकने दे बीच बीच में इसे चलाते रहे। 
  4. जब मिश्रण थोड़ा गाढ़ा होने लगे तो इसमें केसर और इलायची पाउडर डालें इसके बाद लगातार चलाते हुए 2-3 मिनट और पकाये। 
  5. बाउल में निकालकर कटे पिस्ता से सजाए और गरमा गर्म सर्व करें।अगर आपको ठंडा पसन्द हो तो फ्रिज में ठंडा करके सर्व करें। 
आपने मेरे इस आर्टिकल को पड़ा इसके लिए में आपका हार्दिक धन्यवाद करती हूँ। इसमें दिए गए व्यंजन की विधि को घर पर जरूर बना कर देखें और नीचे दिए गए कमेंट में सूचित करने की कृपा करें। 😊😊

लहसुन के घरेलू उपाय

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Benefits of garlic.

दोस्तों आज में अपने इस आर्टिकल में आपको लहसुन के घरेलू उपाय और फ़ायदे बताने जा रही हूँ। लहसुन एक ऐसी सामग्री है जो की सब्जियों का स्वाद बड़ा देती है और सेहत के लिए भी फायदेमंद होती है। लहसुन में ऐसे गुणकरी तत्व होते है।  जो की हमे बीमारियों से दूर रखने में सहायक होते है। लहसुन को आयुर्वेद में औषधि की तरह माना जाता है लहसुन डाइजेशन के लिए भी अच्छा होता है। लहसुन में एलीकीन नामक तत्व होता है जो की जीवाणुरोधी, एंटीवायरल, एंटीफंगल होता है।

(1) कोलेस्ट्रॉल  

लहसुन का प्रयोग करने से कोलेस्ट्रॉल कम हो जाता है अतः यह ह्रदय रोग के आक्रमण को रोकने में बहुत सक्षम है। लहसुन की 4-5 कलियां सेवन करते रहने से धमनियों में जमा हुआ कोलेस्ट्रोल निकल जाता है, सिकुड़ी व सख्त हो रही धमनियां ठीक व लचीली हो जाती है और रक्तचाप सामान्य गति पर आ जाता है। ह्रदय रोग के रोगी को तो नियमित रूप से इसकी कलियों का प्रयोग करते ही रहना चाहिए।

(2) गठिया 

एक लहसुन की कलियां छीलकर 50 ग्राम तेल में डालकर उबालें। लहसुन की कलियां जल जाएं तब उतार लें। इस तेल से रोजाना गठिया ग्रस्त अंगो पर मालिश करनी चाहिए। लहसुन की 4-5 कली रोज चबाकर खाना चाहिए। ये बहुत लाभकारी उपाय है।

(3) हूपिंग कफ 

इसे काली खांसी कहते है। 1 बादाम शाम को पानी में डाल दें। सुबह इसे छीलकर मिश्री और एक लहसुन मिलाकर पत्थर पर पीसकर बच्चे को चटा दें। लहसुन की कलियों की माला बनाकर गले में डाल दें और लहसुन के पके तेल से गले व छाती पर मालिश करें। 2-3 दिन में आराम हो जाएगा। ये नुस्ख़ा भी बहुत लाभकारी है। 

(4)जी मचलाना 

जी मचलाने, उल्टी होने या उल्टी जैसा जी होने पर 2 कली चबाकर खाने से आराम हो जाता है और जी मचलाना या उल्टी होना बन्द हो जाता है। यह नुस्खा बहुत लाभकारी है।

(5) पायरिया 

मसूड़ों की सूजन, पकना, पिलपिला होना, दर्द करना, बदबू करना आदि लक्षण पायरिया होने के है। इससे छुटकारा पाने के लिए शहद में लहसुन का रस मिलाकर चाटे। 50 ग्राम सरसों के तेल में लहसुन की कलियां पीसकर डालें और गर्म करें। लहसुन जल कर कला हो जाए तब उतार कर छान लें। इस तेल में 15 ग्राम सेंधानमक पीसकर डालें और 30 ग्राम अजवायन तवे पर जलाकर पीसें व इस तेल में डाल दें। इस तेल को मसूड़ों पर लगाकर 20-25 मिनट तक लगाएं रखना चाहिए। यह मुख की दुर्गन्ध का नाश कर सब विकारों को दूर करता है। 2-3 महीने नियमित प्रयोग करने से पायरिया रोग ठीक हो जाता है। 

(6) कान बहना 

कण बहना, दुखना और पकना ठीक करने के लिए तिल के तेल में 2-4 कली और आधा चम्मच सिन्दूर डालकर आग पर पकाएं। कली जल जाये तब उतार कर छान लें व ठंडा करके शीशी में भरकर रख लें। इसकी 2-2 बून्द कान में रात को सोने से पहले डालने से कान के सब विकार नष्ट होते है। कण के दर्द के लिए ये एक अच्छा घरेलू नुस्खा है। 

लहसुन के विविध लाभ

लहसुन का नियमित प्रयोग करने से थकान, कमजोरी, वात रोग, ह्रदय रोग, खांसी,शवास, कृमि, फोड़े फुन्सी, चर्म रोग, बाल पकना व झड़ना, मासिक धर्म के विकार आदि अनेक व्याधियां नष्ट हो जाती है। लहसुन खाने के बाद सूखा धनिया चबाने से इसकी गन्ध नहीं आती।

आपने इस आर्टिकल को देखा इसके लिए आपका धन्यवाद करते है | इसमें दिए गए नुस्खो को प्रयोग कर परिणाम नीचे कमेंट में सूचित करने की कृपा करें | 😊😊

JBL Flip 2 Portable Bluetooth Speaker Review

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jbl flip 2

दोस्तों आज में आपको JBL Flip 2 Portable Bluetooth Speaker का Review देने जा रही हूँ।

इस speaker को में 2 साल से खुद यूज कर रही हूँ। इसे मैने Online Flipkart साईड से मंगाया था।

इसकी सॉउन्ड बहुत ही sharp और clean है full वॉल्यूम करने पर भी आवाज क्लियर आती है। जब मैने मंगाया था तब इसकी कीमत 3,799 थी।

आज इसकी कीमत 3200 के लगभग है।अभी तक तो ये ठीक ही चल रहा था पर इसकी charging cable खराब हो जाने की वजह से अब इसको charge करने में प्रॉब्लम आरही है।

ये mobile की charging cable से भी charge हो जाता है पर उससे charge नहीं करना चाहिए क्योंकि अगर आप speaker को mobile charger से charge करोगे तो स्पीकर की charging pin खराब हो जाएगी और chrging होने में प्रॉब्लम आएगी। 

ये में अपने एक्सपीरयंस से कह रही हूँ। बाकी परफॉर्मेंस बहुत ही बढ़िया है इसका bluetooth बहुत ही बढ़िया काम करता है इसे में अपने 49 इन्च की LED के साथ कनेक्ट करके चलाती हूँ। 
 ये काफी दुरी होने पर भी कनेक्ट हो जाता है और किसी भी फ़ोन से कनेक्ट हो जाता है और य USB cable से भी कनेक्ट हो जाता है।

Description and Features

Brand---------------------------------------- JBL 
Manufacturer------------------------------  JBL
Product Dimensions----------------------  6.5 x 6.5 x16 cm
Additional Features-----------------------  NFC Enabled, Built-in Microphone
Speaker Connectivity--------------------- Wired
Wattage------------------------------------- 12 Watts
Batteries Required------------------------- No
Audio Wattage----------------------------- 6 Watts
Voltage-------------------------------------- 3.7 Volts
USE Time---------------------------------- 8 hr
Battery Cell Composition----------------- Lithium
USB-----------------------------------------  yes
 Type----------------------------------------  Mobile/TV/ Tablet
Wireless------------------------------------- yes
Connector Type---------------------------  Flip2BLKEDITION-cr
Color---------------------------------------  Black
Warranty----------------------------------- 6 Month
Toll Free Number------------------------- 18001020525 Register any Complaint on the product

iBall Nirantar UPS-621V Review

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iBall Nirantar UPS-621V
दोस्तों आज में आपको इस आर्टिकल में iBall UPS-621V का review देने जा रही हूँ जो की मै खुद यूज कर रही हूँ।

इसे मैने 2 साल पहले online Snapdeal साइड से मंगाया था। इसे मैने अपने wifi router के लिए मंगाया था। 6 month के बाद ups बंद हो गया था .

क्योकि इसके अन्दर का part खराब हो गया था। iball की service center कॉल लगाया और तुरन्त दूसरे दिन ही उन्होने यूपीएस का part बदल दिया और तबसे आज तक यूपीएस में कोई प्रोब्लम नहीं आई।

मैने एक और  iBall का UPS अपने टीवी के लिए भी मंगाया। इसे मैने Amazon से मंगाया था इसे भी 1 साल हो गए अभी तक कोई प्रॉब्लम नहीं आयी। iball की सर्विस बहुत ही बढ़िया है .

जब मैने मंगाया था तब ये Rs 1599 का था पर आज इसकी कीमत  Rs 2200 के लगभग हो गई है। इसका बैटरी बैकअप भी लगभग 20 से 40 मिनट तक का है डिपेन्ड करता है की कितनी डिवाइसेस आपने ups में लगाई है उसके लोड पर डिपेंड  करता है। 

अगर आप कोई यूपीएस लेने की सोच रहे है तो ये एक अच्छा और worth for money product है।

Product Specification

Brand ---------------------- -------------iBall
Manufacturer--------------------------- iBall 
Series------------------------------------ Nirantar
Colour----------------------------------- Black
Item height----------------------------- 14.2cm
Item Width----------------------------- 10 cm
Product dimensions------------------- 27.8 x 10 x14.2cm
Item model number------------------- UPS-621V
Voltage---------------------------------- 230 volts
Wattage--------------------------------- 360 Watts
Included components----------------- 1UPS and Manual 
Warranty information----------------- 2 Year warranty
Service Center phone number------- 0120-4157092

पति पत्नी दो गहरे मित्र

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Husband and wife are two best friends.

दोस्तों इस आर्टिकल में मै आपसे पति पत्नी दो गहरे मित्र के बारे में चर्चा करुँगी। जो की पति पत्नी के सम्बन्धों के विभिन्न रूप हो सकते है और उनमे से एक है मित्रता का, घनिष्ट, अटूट और आत्मीय मित्रता का, जो जीवन पर्यन्त कायम रहती है या कहिए की रहनी चाहिए।

यूं पति का शाब्दिक अर्थ 'स्वामी' या 'संरछक' होता हैऔर पत्नी हिस्सेदार अर्थात लाइफ पार्टनर यानि अर्धागिनी। इस प्रकार यह सम्बन्ध संसार के सभी प्रकार के सम्बन्धों में विलक्षण एवं विशिष्ट है।

जो दम्पत्ति इन सम्बन्धों को निभा लें जाते है उनका जीवन सुख और समृद्धि से पूर्ण रहता है।

 गाड़ी के दो पहिए 

एक गाड़ी के दो पहिऐ या रेल की दो पटरियों जैसे दाम्पत्य जीवन के दो अंग है पति पत्नी, जो यदि तन मन से मिल जुल कर रहें तो दो गहरे मित्र की तरह वैसे ही एक रूप हो जाते है।

जैसे दो नदियों का संगम हो जाने पर उन दोनों नदियों का जल एकाकार हो जाता है वरना विपरीत स्थिति में दाम्पत्य रस रूपी जल सुख जाने से नदी के दो किनारों की तरह वे आमने सामने और सदा साथ रहते हुए भी हमेशा अलग और न मिल सकने वाले होकर रह जाते है।

दाम्पत्य जीवन के विशाल वृक्ष से निकलने वाली शाखें पत्तियां, फल फूल तभी हरे भरे रह सकते है जब यह दाम्पत्य-वृक्ष मजबूत और गहरी जड़ो वाला हो।

समान गुण

समान गुण कर्म स्वभाव होने पर प्रीति स्थिर रहती है और सम्बन्ध घनिष्ट व स्थायी रहते है यह सूत्र पति पत्नी को हमेशा ध्यान में रखकर परस्पर ऐसा ही आचरण करना चाहिए।

यदि गुण कर्म स्वभाव में अन्तर हो तो प्रेम, सहानुभूति और सद्बुद्धि से काम लेकर परस्पर सामन्जस्य पैदा करने की सच्चे व सरल मन से पूरी कोशिश करना चाहिए .

ताकि व्यर्थ के मतभेद और विवाद न पैदा हो अन्यथा मानसिक तनाव से घर का वातावरण दूषित होने लगेगा जिसका दुष्प्रभाव परिवार के सभी सदस्यों के स्वास्थ्य का नाश करता रहेगा।

दाम्पत्य जीवन का अच्छा या बुरा प्रभाव पति पत्नी के अलावा उनकी सन्तान पर भी पड़ता है जिसके बुरे प्रभाव होते है। इसलिए पति पत्नी को एक दूसरे के साथ दो गहरे मित्र की तरह रहना चाहिए

सूझबूझ

यह पति पत्नी की सूझबूझ और चतुराई पर ही निर्भर है कि वे अपने घर का वातावरण हल्का फुल्का, प्रसन्नतापूर्ण और पारस्परिक सहयोग से भरा हुआ बनाए रखें .

जिसके लिए उदार, सौजन्यतापूर्ण एवं सहयोगात्मक व्यवहार किया जाना बहुत आवश्यक है तभी तो पति पत्नी दो गहरे मित्र बनकर रहेंगे।

बीजारोपण 

दो गहरे मित्रता का बीजारोपण दाम्पत्य जीवन के प्रारम्भ से ही हो सकता है जब पति पत्नी पहली बार मिलते है। अंग्रेजी में एक कहावत है कि first impression is the last impression अर्थार्त पहले पहल के प्रभाव का प्रभाव दूरगामी होता है।

दो बिल्कुल अजनबी प्राणी विवाह संस्कार के बन्धन में बंधकर सदा सदा के लिए साथी बनते है इसीलिए उन्हें जीवन साथी कहा जाता है।

समर्पण भाव 

यह बड़ी अद्भुत बात है कि जो एक दूसरे को जानते न थे कभी मिले ही न थे वे जब मिल जाते है तो थोड़े ही समय में दूध पानी जैसे एकाकार हो जाते है।

जितना अपनापनऔर प्यार पति पत्नी के रूप में मिलने वाले इन दो अजनबियों में पैदा हो जाता है या हो सकता है। इस मधुर प्रगाढ़ता का आधार स्तम्भ है समर्पण भाव

नारी में तो ख़ैर यह गुण जन्म जात ही होता है और होना भी चाहिए। 

पर पुरुषों में भी यह गुण समुचित मात्रा में होना चाहिए क्योंकि कुछ मुकाम ऐसे होते है, कुछ परिस्थितियां ऐसी होती है और कुछ आवश्यकताएं ऐसी होती है। 

जब पुरुष को भी अपना 'पुरुष पन' छोड़कर भावनात्मक स्तर पर नारी से सामन्जस्य करना जरूरी हो जाता है क्योंकि वह सामन्जस्य दाम्पत्य जीवन में माधुर्य और स्थायित्व बनाए रखता है।

दोनों इस जीवन यात्रा में सफल हमसफर बनकर यात्रा को सुखद व सफल बना सकते है।

सिक्के के दो पहलू 

जरा गहरे में सोचें तो पुरुष में नारी और नारी में पुरुष कुछ कुछ अंशो में मौजूद होते है। दर असल नर नारी एक ही सिक्के के दो पहलू है। 

एक ही वस्तु के दो भाग है जो परस्पर मिलकर ही पूर्ण होते है, एक बनते है। दोनों एक दूसरे के अर्द्धांग और एक दूसरे के बिना आधे व अधूरे है।

इसी अधूरेपन को पूरा करने की भावनावश वे दोनों एक दूसरे के प्रति आकर्षित रहा करते है। इस सच्चाई को जिस पति पत्नी ने मन से स्वीकार कर लिया, आचरण में उतार लिया और बुद्धिपूर्वक जी लिया। 

उनके सम्बन्ध ही सच्चे मित्रों जैसे रह पाते है।मित्र वही होता है जो मित्र के दुख को दूर करने की जी जान से कोशिश करें। 

कर्तव्य एवं अधिकारों का पालन 

जहां तक पत्नी का प्रशन है तो भारतीय नारी तो जन्मजात संस्कारों से ही समर्पित, धैर्यशील, सहनशील और तपस्वी स्वभाव की होती है और पति का प्यार व सहयोग पाकर उसकी जीवनलता खूब फलती फूलती है। 

लेकिन प्रायः पति अपने स्वभाववश, अहंकारवश या जीविकोपार्जन एवं दुनियादारी के अनेक कारणों, तनावों और संकटों से ग्रस्त होने के कारण ऐसी कुंठाओं से ग्रस्त रहते है कि वह पत्नी के प्रति पूर्ण, सजग, भावुक और संवेदनशील नहीं रह पाते।

फलस्वरूप उनके व्यवहार में उपेक्षा, लापरवाही, अवहेलना और रूखेपन के तत्व पनपने लगते है जो वक्त पर ही सम्हाले न जाए तो धीरे धीरे यही तत्व विरोध, वैचारिक मतभेद, विवाद, तनाव, कलह और कभी कभी अलगाव का रूप धारण कर लेते है। 

इसमें महिलाएं उतनी दोषी और जिम्मेदार नहीं होती जितना पुरुष होते है। पति से समुचित और सामान्य व्यवहार प्राप्त करना पत्नी का अधिकार है और यही पति के लिए कर्तव्य हो जाता है।

जो एक का अधिकार होता है वही दूसरे के लिए कर्तव्य हो जाता है और पति एवं पत्नी दोनों को ही अपने अपने कर्तव्य एवं अधिकारों का पालन करना चाहिए। 

 बाहरी और भीतरी जिम्मेदारी 

यदि पुरुष परिवार का प्रधान और सर्वेसर्वा होता है अधिक पुरुषार्थी और परिश्रमी होता है तो पत्नी भी घर की स्वामिनी और घरेलू मामलों की सर्वेसर्वा होती है।

अपने ढंग से, अपने स्तर और सामर्थ्य से अधिक परिश्रम करते हुए वह भी कोई कसर उठाकर नहीं रखती। दरअसल दम्पत्ति का बाहरी रूप पति और भीतरी रूप पत्नी होती है।

घर से बाहर पति और घर के अन्दर पत्नी का कार्यक्षेत्र एवं उत्तरदायित्व रहे तो सन्तुलन ठीक रहता है। 

इस प्रकार पति पत्नी एक सच्चे मित्र और सहयोगी का रूप में आचरण कर परस्पर अटूट आस्था और प्रेम की भावना रखें तो वे पति पत्नी होने के साथ ही भावुक और रोमांटिक प्रेमी प्रेमिका भी बने रह सकते है।
आपने इस आर्टिकल को पढ़ा इसके लिए आपका धन्यवाद करते है | कृपया अपनी राये नीचे कमेंट सेक्शन में सूचित करने की कृपा करें | 😊😊

माइक्रोवेव में 5 तरह के व्यंजन बनाने की विधि

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Microwave food.

दोस्तों आज मै इस आर्टिकल में माइक्रोवेव में 5 तरह के व्यंजन बनाने की विधि बताउंगी।मै आपको माइक्रोवेव में बनी हैल्दी ग्रीन इडली, दलिया उपमा, जो की बहुत पौष्टिक होती है और बच्चे भी बहुत शौंक से खाते है। आप इसे सुबह के नाश्ते में या शाम के सनेक्स में बना सकते हो। ज्यादातर इडली और दलिया उपमा सभी को पसन्द होता  है। ये खाने में भी हल्का होता है। और माइक्रोवेव में आप अरेबिक पनिनी, पनीर शिमला मिर्च, लो फैट चिकन टिक्का भी बना सकते हो इन सभी व्यंजनों को बनाने की सामग्री और विधियां इस प्रकार है।

(1) हैल्दी ग्रीन इडली बनाने की सामग्री 

  • 1 कप सूजी (रवा)
  • 1 बड़ा चम्मच ऑलिव ऑयल 
  • 1 कप दही 
  • 1/2 कप पीसी पालक 
  • 1/2 छोटा चम्मच मीठा सोडा 
  • 3/4 छोटा चम्मच नमक

हैल्दी ग्रीन इडली बनाने की विधि 

  1.  1 बड़ा चम्मच ऑलिव ऑयल डिश में डालें।1 मिनट के लिए माइक्रोवेव करें।फिर सूजी डालकर अच्छे से मिलाए। 
  2. बिना ढके 2 मिनट के लिए माइक्रोवेव करें। नमक डालें। अच्छे से मिलायें। ठण्डा करें।
  3.  दही और पालक की पेस्ट डालकर अच्छे से मिलायें। मीठा सोडा डालें और अच्छे से मिलायें। 1/4 कप पानी मिलाकर घोल को कुछ पतला कर लें।10 मिनट के लिए अलग रखें।
  4.  6 काँच की कटोरी या प्लास्टिक इडली बॉक्स चिकने करें। 3-4 बड़े चम्मच मिक्सचर प्रत्येक कटोरी में डालें। कटोरियों को माइक्रोवेव में रखकर बिना ढके 31/2 मिनट के लिए माइक्रोवेव करें। 
  5. ओवेन से निकाले और 5 मिनट के लिए रख छोड़े। सांभर और चटनी के साथ परोसें

(2) दलिया उपमा बनाने की सामग्री

  • 1 कप दलिया
  • 1/2 कप फूलगोभी छोटी कटी हुई 
  • 1 गाजर बारीक़ कटी हुई
  • 4-5 बींस बारीक़ कटे हुए
  • 2 बड़े चम्मच मटर के दाने
  • 2 बड़े चम्मच ऑलिव ऑयल
  • 1/2 छोटा चम्मच सरसों (राई)
  • 2 बड़े चम्मच हरा धनिया बारीक़ कटा हुआ
  • 11/2छोटा चम्मच नमक
  • 1/4 छोटा चम्मच हल्दी
  • 1/2 छोटा चम्मच चीनी 1 छोटा चम्मच नींबू का रस

दलिया उपमा बनाने की विधि 

  1. एक चपटी डिश में 1 बड़ा चम्मच ऑलिव ऑयल डालें और 1 मिनट माइक्रोवेव करें। दलिया डालें।अच्छे से मिलाये। 2 मिनट माइक्रोवेव करें। 
  2. अच्छे से मिलाये और 2 मिनट दुबारा माइक्रोवेव करें।डिश से निकाले।साफ डिश में एक बड़ा चम्मच ऑलिव ऑयल और राई डालकर 2 मिनट माइक्रोवेव करें।
  3. अब सब्जियां, हरा धनिया और 1/2 छोटा चम्मच नमक डालें।मिलाये।ढककर 3 मिनट माइक्रोवेव करें।
  4.  1/4 छोटा चम्मच हल्दी, चीनी और 1 छोटा चम्मच नमक डालें। दलिया डालें और अच्छे से मिलाये।2 कप पानी डालें।मिलायें ढके और 10 मिनट के लिए माइक्रोवेव करें। 
  5. स्वादानुसार नींबू का रस मिलायें। काँटे से चलाकर परोसें।

(3) अरेबिक पनीनी बनाने की सामग्री 

  • 2 पनीनी ब्रेड या बन 
  • 1 चिकन ब्रेस्ट हड्डी के साथ (150 ग्राम)
  • 1 बड़ा चम्मच ऑलिव ऑयल 
  • 1 छोटा चम्मच नींबू का रस 
  • 1-2 छोटे चम्मच अरेबिक मसाला 
  • 1/2 प्याज पतले स्लाइस कटे 
  • 1/2 कप कार्न उबले हुए 
  • 1 छोटी शिमला मिर्च 
  • 2 बड़े चम्मच रेडीमेड मेयोनीज 
  • 1/2 छोटा चम्मच नमक 
  • 1-2 छोटा चम्मच रेड चिली सॉस 
  • कुछ सलाद या बन्दगोभी के पत्ते

अरेबिक पनीनी बनाने की विधि 

  1. चिकन में 1 बड़ा चम्मच ऑलिव ऑयल, 1 छोटा चम्मच नींबू का रस, 1/2 छोटा चम्मच नमक और अरेबिक मसाले को मिलाए। 
  2. माइक्रो प्रूफ बाउल में रखें और 3 मिनट के लिए ढककर माइक्रोवेव करें।माइक्रोवेव से निकाले।ठण्डा करें और हड्डी निकाल लें।
  3. 1 बाउल में चिकन के टुकड़ो के साथ प्याज, कार्न, शिमला मिर्च, मेयोनीज नमक काली मिर्च और रेड चिली सॉस एक साथ मिलाये और मसलें। 
  4. भरावन का स्वाद थोड़ा तेज रखें जिससे ब्रेड पर लगाने पर स्वाद फीका न लगे।पनीनी ब्रेड को दो भाग में काटे।
  5.  चिकन मिक्सचर को ब्रेड के नीचे वाले भाग पर फैला दे।बन्दगोभी के पत्तों को छोटे टुकड़ो में तोड़े और भरावन पर रखें दूसरे स्लाइस को भरावन पर रखें। 
  6. ग्रिल को 10 मिनट के लिए पहले से गरम करें।सेंडविच को वायर रैक पर रखें। 7-8 मिनट के लिए ग्रिल करे।
  7. 5 मिनट के बाद बीच में पलटकर, 2-3 मिनट ग्रिल करें। जब तक दोनों तरफ से सुनहरा और कुरकुरा न हो जाये।
  8. अब इसे माइक्रोवेव से निकाल लें बनकर तैयार है आप इसे नाश्ते में भी सर्व कर सकते हो। 

(4) पनीर शिमला मिर्च बनाने की सामग्री 

  • 200 ग्राम पनीर (चौकोर टुकड़े)
  • 2 शिमला मिर्च (लम्बे पतले टुकड़े )
  • 2 बड़े चम्मच ऑलिव ऑयल 
  • 4 कली लहसुन (पिसी हुई)
  • 1/2 कप टोमैटो प्यूरी 
  • 1 छोटा चम्मच लाल मिर्च पाउडर 
  • 1 छोटा चम्मच धनिया पाउडर 
  • 1/2-1 छोटा चम्मच गरम मसाला 
  • 1 छोटा चम्मच
  • 1/2 छोटा चम्मच चीनी

पनीर शिमला मिर्च बनाने की विधि 

  1. एक डिश में ऑलिव ऑयल और लहसुन डालें।बिना ढके 1 मिनट के लिए माइक्रोवेव करें।
  2. अब टोमैटो प्यूरी, नमक, चीनी, लाल मिर्च, धनिया, और गरम मसाला पाउडर डालें।अच्छी तरह मिलाये।
  3. शिमला मिर्च डालें।अच्छी तरह मिलाये।बिना ढके 5 मिनट तक माइक्रोवेव करें। 
  4. पनीर डालें अच्छी तरह मिलाये और एक तरफ रखें। 
  5. परोसने के समय, ढककर 2 मिनट के लिए माक्रोवेव करें और गरमा गर्म परोसे।

(5) लो फैट चिकन टिक्का बनाने की सामग्री 

  • 400 ग्राम बिना हड्डी का चिकन ( छोटे टुकड़ो में)
  • थोड़ा चाट मसाला 
  • थोड़ा नींबू का रस 
  • 2 बड़े चम्मच ऑलिव ऑयल

मेरिनेड (एक साथ मिला लें)

  • 1/2 कप दही 
  • 2 छोटे चम्मच कार्नफ्लोर 
  • 1 बड़ा चम्मच ऑलिव ऑयल 
  • 2 छोटे चम्मच अदरक लहसुन पेस्ट 
  • 1 बड़ा चम्मच तन्दूरी मसाला 
  • 1/4 छोटा चम्मच काला नमक 
  • 1/2 छोटा चम्मच लाल मिर्च पाउडर 
  • 1 छोटा चम्मच नमक 
  • 2-3 बूंदे तन्दूरी लाल रंग

लो फैट चिकन टिक्का बनाने की विधि 

  1. दही को मलमल के कपड़े में बाँधकर 30 मिनट के लिए लटकाएँ और पानी निकाल दें।
  2. चिकन को 1 टुकड़े में काट लें धोएं और नेपकिन पर पोंछ लें।इन टुकड़ो को 2-3 घण्टे के लिए मेरिनेड में मिला कर परोसने के समय तक फ्रीज में रखें।
  3. माइक्रोवेव ओवेन को कन्वेक्शन मोड पर 180 C पर करके बटन दबाएँ और ओवेन को गरम करें।लो रैक को तेल से चिकना कर लें।
  4. चिकने किये हुए रैक पर टिक्के रखें और गरम ओवेन में रख दें।20-25 मिनट या पकने तक ओवेन में रखें। 
  5. ओवेन में से निकाले।चाट मसाला और नींबू का रस छिड़कें और गरमा गर्म परोसें।
आपने मेरे इस आर्टिकल को पड़ा इसके लिए में आपका हार्दिक धन्यवाद करती हूँ। इसमें दिए गए व्यंजन की विधि को घर पर जरूर बना कर देखें और नीचे दिए गए कमेंट में सूचित करने की कृपा करें। 😊😊

जीवन में सहनशीलता और धैर्य

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Patience and tolerance.

Hello दोस्तों आज मै अपने इस आर्टिकल में जीवन में सहनशीलता और धैर्य के विषय में बता रही हूँ जो की आज के युग में जिन माननीय गुणों की प्रायः हममें कमी होती जा रही है। 

उनमें से एक है सहनशीलता और दूसरा है धैर्य   बहुत कम लोग वाकई सहनशील  होते है। कुछ तो अपने भड़कने और उत्तेजित हो उठने के स्वभाव से विवश होने के कारण नाम मात्र भी सहनशील नहीं होते।

ऐसे लोग बड़े शेखीबाज और घमण्डी होते है। ये सब अवगुण हीन भावना (इन्फीरियरिटी काम्प्लेक्स) के कारण से ही होते है।

सहनशीलता 

कुछ लोग वास्तव में तो सहनशील नहीं होते पर एटिकेट, मैनर्स याने शिष्टाचार के नाम पर सहनशील होने का अभिनय किया करते है।

उनकी मुस्कराहट नकली और नम्रता बनावटी होती है। वे यांत्रिक ढंग से शराफत का ऊपरी दिखावा करते है। जो पति पत्नी घर में तूतू मै मै किया करते है वे बाहर मुस्कराते हुए और बन ठन कर निकलते है। ताकि दुसरो को प्रसन्न और खुशहाल दिखाई दें।

लेकिन इससे तब तक कुछ हासिल नहीं होता जब तक आप अन्दर से सहनशील नहीं होते। अन्दर यदि सहनशीलता का भाव नहीं हुआ तो बाहर का अभिनय ज्यादा देर तक टिक नहीं सकेगा।

जरा सी खरोंच लगते ही जैसे शरीर की त्वचा से खून छलक आता है इसी प्रकार जरा सा किसी का धक्का लगते ही आप उबल पड़ेंगे और चीख कर कहेंगे--अन्धे हो क्या ? दिखाई नहीं देता ?

जरा कोई आपका अपमान कर दे तो आप आपे से बाहर हो जाते है। कोई अपशब्द बोल दें तो आपका मूड उखड़ जाता है। 

कोई गाली दें तब तो आप खटिया खड़ी किये बिना मानने को राजी नहीं हो सकते। लेकिन जब तक आप खुद गाली लेने को राजी न हो तब तक कोई कैसे आपको गाली दे सकता है ? 

जब तक आप स्वयं ही अपमान स्वीकार न करें तब तक कोई कैसे आपका मान बिगाड़ सकता है ?सहनशीलता ऐसा सद्गुण है जो हमें व्यर्थ ही उत्तेजना, कुण्ठा और कुढ़न से बचाता है, तनाव से दूर रखता है। क्रोध और द्वेष से बचाता है।

महात्मा बुद्ध को एक व्यक्ति बहुत अपशब्द बोल कर चला गया और बुद्ध चुपचाप सुनते रहे। उस व्यक्ति को बड़ी आत्मग्लानि हुई और वह पशचाताप करता हुआ दूसरे दिन आकर क्षमा याचना करने लगा।

महात्मा बुद्ध बोले क्षमा याचना की आवश्यकता नहीं क्योकि जो तुम कल  मुझे देना चाहते थे वह मैने लिया ही नहीं। फिर न मै आज वह हूँ जो कल था और न तुम ही वह हो जो कल थे।

अतः गुजरी बात गुजर गई अब उस पर क्या सोच विचार करना। आज इस क्षण में हम जो है, जैसे है। वहीं है वैसे ही है अतः इस क्षण पर ही विचार करो और गुजरी बात भूल जाओ।

सहनशील होना कायर होना नहीं, गम्भीर और उदार होना है। विशाल ह्रदय होना है। हम तनाव रहित और द्वेष रहित हो सके इसके लिए हमे सहनशील होना ही पड़ेगा।

यही मार्ग महापुरषों ने बताया है। जब कभी उत्तेजित या क्रोधित होने का मुकाम आए तब आप मुस्करा कर देखें। मान लीजिए, राह चलते गलती से किसी का धक्का आपको लग गया और आप गुस्सा नहीं हुए।

मुस्करा कर बोले --कोई बात नहीं, तो वाकई बात वहीं खत्म हो जाती है और आप हल्के फुल्के बने रहते है। इन बातों को अपने जीवन में अजमा कर देखिये थोड़ा मुश्किल जरूर है पर कोशिश करके देखिये।

धैर्य (सब्र)

आपने यह कहावत तो सुनी होगी कि धैर्य का फल मीठा होता है। यह कहावत बहुत गहराई रखती है और गहरे अनुभवों के बाद कही गई है।

धैर्य बहुत बड़ा बल और उतावलापन याने अधैर्य बहुत बड़ी निर्बलता है। जो व्यक्ति धैर्य रखते है वे अपने लक्ष्य को पाने में जुटे रहते है, निरन्तर प्रयतन करते रहते है और अन्त में अपना लक्ष्य पाने में सफल होते है।

पहिया चलता रहे तो गाड़ी मंजिल तक पहुंच ही जाती है। धैर्य ही वह पहिया है जो बंद न हो, जिसकी गति क्रम टूटे नहीं तो यात्री अपनी मंजिल प् लेता है। इसमें देर भले ही हो सकती है पर अन्धेर नहीं हो सकता। 

कुछ कार्य सरल होते है झट से हो जाते है कुछ कार्य कठिन होते है और मुश्किल से हो पाते है, जबकि कुछ कार्य बहुत कठिन और समय साध्य होते है जिनके सम्पन्न होने में समय लगता ही है और ऐसे कार्यो में धैर्य की जरूरत पड़ती है। 

क्योकि धैर्य होगा तो ही हम निरन्तर प्रयत्शील रह सकेंगे वरना धैर्य छूट जाने पर निराश होकर काम छोड़ देंगे। धैर्य और साहस परस्पर मित्र है और किसी भी गाड़ी के दो पहियों की भाती है। 

इन दो पहियों में यदि 'स्थिर बुद्धि ' की धुरी (एक्सिल) लगी होगी तो पहिये बराबर घूम सकेंगे। एक्सिल स्लिप हो जाए या टूट जाए तो गाड़ी आगे न बढ़ सकेगी।

इसलिए धैर्य बना रहे इसके लिए स्थिर बुद्धि का होना बहुत जरूरी है बुद्धिहीन धैर्य नहीं रख पाते या यू कह लीजिए कि धैर्य हीन होना बुद्धिमानी नहीं।

धैर्य टूट जाना वैसा ही होता हे जैसे कोई रस्सी के सहारे ऊपर चढ़ रहा हो और अधबीच में धैर्य रूपी रस्सी टूट जाए। 

ऊपर तक पहुंचने के लिए धैर्य रूपी रस्सी न टूटना अनिवार्य है बार बार प्रयतन करना हमें सफल कर ही देता है। लेकिन ऐसा तभी हो सकता है जब हम धैर्य धारण किए रहे। 

इसलिए चलते रहने पर ही हम मंजिल तक पहुंच सकते है। चलते रहना ही जीवन का नाम है, रुक जाना मृत्यु है। सक्रियता जीवन है निष्क्रियता मृत्यु है। पुरुषार्थ जीवन है आलस्य मृत्यु है।

धैर्य जीवन है अधैर्य मृत्यु है। यही हमारे जीवन की सफलता और उन्नति का मूल मन्त्र है। मनु महाराज ने धैर्य की गणना धर्म के दस लक्षणों में की है और "धरतीति स धर्मः " के अनुसार धर्म वही है जो धारण किया जाए अतः धैर्य का धारण करना धर्म और धारण न करना अधर्म होगा। 

विपत्ति के समय धैर्य ही हमारा सबसे बड़ा मित्र सबसे बड़ा बल और सबसे जरूरी सहारा होता है और संकट के समय धैर्य की परीक्षा भी हो जाती है।

अतः हमें धैर्य का साथ कभी नहीं छोड़ना चाहिए तभी हम जीवन की कठिन रहो पर, सच्ची और हितकारी राहों पर कदम बढ़ाते रह सकेंगे और कठिनाइयों व संघर्षो पर विजय पा सकेंगे। महापुरषों ने हमे यही रह दिखाई है और कहा है --

 न्याययातपथः प्रविचलन्ति पंद न धीराः। 

जो धीर अर्थात धैर्यवान होते है उनके कदम न्याय मार्ग पर चलते हुए डगमगाते नहीं, विचलित नहीं होते।

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