जीवन का सबसे सुन्दर समय बचपन

बचपन

दोस्तों आज मैं इस आर्टिकल में आपसे जीवन के सबसे सुन्दर समय बचपन के बारे में अपना अनुभव शेयर करना चाहूंगी। उम्मीद है आपको पसंद आएगा।

सुन्दर बचपन

हमारा बचपन इस दुनिया के सतयुग के समान होता है। जब दुनिया अपनी बाल्यावस्था में थी तब सतयुग था। सतयुग याने सत्यताओं से भरा और झूठ कपट से रहित युग। हम जब पैदा होते है तो कोरी स्लेट की तरह अबोध, निर्दोष और भोले होते है। तब न हम अच्छे होते है न बुरे होते है, निर्विकल्प होते है,च्वाइस लेस होते है। बच्चा माँ का दूध पीकर मस्त हो जाता है हाथ पैर चलता है और किलकारियां भरता है। यह स्थिति आनन्द की है। वहां न सुख है न दुख है। यह स्थिति परमहंस होने पर होती है निर्विकल्प होने पर होती है हर बात से राजी रहने पर होती है, एक शिशु की तरह।

फिर जैसे जैसे हम बड़े होते है दुसरो के सम्पर्क में आते है हमें दुनिया की हवा लगती है वैसे वैसे हमारा भोलापन खोने लगता है हमारी निर्दोष स्थिति, हमारी आनन्दमय स्थिति बदलने लगती है हम सुख दुख का अनुभव करने लगते है और चुनाव करने लगते है। इच्छाए करने लगते है और धीरे धीरे चालाक होने लगते है। हमारे अनुभव हमे चालाक और बेईमान बनाते जाते है। हम निर्दोष और भोले स्वभाव को छोड़कर ज्यादा चतुर और समझदार होते जाते है लेकिन इससे वास्तव में हमें कुछ मिलता नहीं। मिलता होता तो बच्चे दुखी होते और बड़े सुखी होते।

दुनियां भर की चालाकियाँ करके भी हम सुखी कहां हो पाते है उल्टा होता यह है की हम जितने बचपन से दूर और बुढ़ापे के निकट होते जाते है उतने ही दुखी होते जाते हैं। इसलिए बूढ़े ज्यादा दुखी होते हैं। हमारी समझदारी एक चालाकी बनकर रह जाती हैं लेकिन हम समझे भले ही,पर इस चालाकी से मिलता क्या हैं ? हमारा क्या भला होता हैं ?  

एक मजदूर का कारखाने में काम करते हुए बांया हाथ कट गया। महीने भर अस्पताल में रहा। लोग उससे मिलने आये तो एक मित्र बोला "ईशवर को धन्यवाद करो की तुम्हारा दाहिना हाथ नहीं कटा वरना बेकार हो जाते। अभी काम तो चला ही सकोगे।"

वह मजदूर बोला "धन्यवाद देने की कोई जरुरत नहीं यह चतुराई तो मेरी ही है। हाथ तो मेरा दाहिना ही मशीन में गया था, यह तो मेरी सूझबूझ और चालाकी रही कि मैने दाहिना हाथ बचाने के तत्काल बाहर खींचकर बांया अन्दर कर दिया था। "

हमारी सारी समझदारी सिर्फ इतनी ही है कि हम यह नहीं समझ पाते कि वास्तव में हम हमारा नुकसान ही कर रहे हैं। 

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जीवन के सबसे सुन्दर समय बचपन